जबलपुर। पुलिस की छवि सुधारने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कुछ मामलों में पुलिसकर्मियों का व्यवहार इन प्रयासों पर पानी फेरता नजर आता है। ऐसा ही एक मामला शनिवार को सामने आया, जब पनागर निवासी एक गरीब मजदूर अपनी शिकायत लेकर लार्डगंज थाने पहुंचा, लेकिन आरोप है कि उसकी शिकायत सुनने के बजाय उसे निराश होकर लौटना पड़ा।
पीड़ित शील कुमार बर्मन अपनी पत्नी और बेटी के साथ दोपहर करीब 12 बजे लार्डगंज थाने पहुंचा था। उसके हाथ में एक लिखित आवेदन था, जिसमें उसने कथित धोखाधड़ी की शिकायत की थी। पीड़ित के अनुसार, उसकी परिचित एक महिला ने उसे मकान निर्माण के लिए लोन दिलाने का झांसा दिया। वह कम पढ़ा-लिखा होने के कारण उनकी बातों में आ गया और उनके साथ चला गया।
आरोप है कि महिला और उसके सहयोगी उसे रानीताल चौक स्थित एक बाइक शोरूम ले गए, जहां कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। बाद में उसे पता चला कि मकान निर्माण के लिए लोन दिलाने के बजाय उसके नाम पर लगभग 1 लाख 39 हजार रुपये का वाहन ऋण स्वीकृत कराकर बाइक खरीद ली गई, जिसे महिला और उसके साथी अपने साथ ले गए। अब फाइनेंस कंपनी की किस्तें उसके नाम पर आ रही हैं।
पीड़ित का कहना है कि वह इसी शिकायत को लेकर लार्डगंज थाने पहुंचा था, लेकिन वहां उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। घंटों इंतजार करने के बाद भी न तो उसकी शिकायत दर्ज की गई और न ही उसे कोई संतोषजनक जवाब मिला। निराश होकर वह थाने से लौट आया।
शाम करीब 4 बजे वह मदद की उम्मीद लेकर सामाजिक कार्यकर्ता के पास पहुंचा। आवेदन और दस्तावेजों का अवलोकन करने पर प्रथम दृष्टया मामला धोखाधड़ी का प्रतीत हुआ। बताया गया कि पीड़ित की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि उसके पास दस्तावेजों की फोटोकॉपी कराने तक के पैसे नहीं थे।
इसके बाद उसकी शिकायत डाक के माध्यम से संबंधित थाना प्रभारी को भेजी गई है। उम्मीद की जा रही है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच कर पीड़ित को न्याय दिलाएगी।
यह मामला केवल एक व्यक्ति की शिकायत नहीं, बल्कि उस विश्वास का प्रश्न भी है जो आम नागरिक पुलिस व्यवस्था से रखता है। जब एक गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति अपनी समस्या लेकर थाने पहुंचता है, तो उसकी शिकायत को सुनना और उचित कार्रवाई करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता दिखाई जाए तो पुलिस और जनता के बीच विश्वास और मजबूत हो सकता है।
जिला पुलिस अधीक्षक से अपेक्षा है कि मामले की जांच कराएं, पीड़ित को न्याय दिलाएं तथा यदि शिकायत में तथ्य पाए जाएं तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित करें।










