उदयपुर/जयपुर। देश को झकझोर देने वाले जघन्य अपराधों की सूची में राजस्थान के उदयपुर जिले का फेविक्विक डबल मर्डर केस हमेशा याद रखा जाएगा। नवंबर 2022 में सामने आई इस वीभत्स घटना ने पूरे प्रदेश को सन्न कर दिया था। ढाई साल बाद, अप्रैल 2025 में अदालत ने इस मामले में दोषी करार दिए गए तांत्रिक भालेश को उम्रकैद की सजा सुनाकर यह स्पष्ट कर दिया कि कानून ऐसी अमानवीय क्रूरता के प्रति कोई नरमी नहीं बरतेगा।
यह सनसनीखेज मामला तब उजागर हुआ जब उदयपुर जिले के गोगुंदा थाना क्षेत्र के जंगल में एक सरकारी स्कूल शिक्षक राहुल और महिला सोनू कंवर के नग्न शव बरामद हुए। शुरुआती जांच में ही मामला बेहद संदिग्ध और क्रूर प्रतीत हुआ। पुलिस जांच आगे बढ़ी तो तांत्रिक भालेश की भूमिका सामने आई, जिसकी गिरफ्तारी के बाद अपराध की परत-दर-परत भयावह सच्चाई सामने आई।
पुलिस के अनुसार आरोपी भालेश के सोनू कंवर के साथ पिछले करीब पांच वर्षों से अवैध संबंध थे। इसी दौरान सोनू का संपर्क शिक्षक राहुल से हो गया, जिसे लेकर भालेश के मन में आक्रोश और बदले की भावना पनप गई। इसी के चलते उसने दोनों को रास्ते से हटाने की साजिश रची। भालेश ने राहुल और सोनू को सुलह कराने के बहाने जंगल में बुलाया और वहां उन्हें आपसी संबंध बनाने के लिए उकसाया।
फेविक्विक से चिपकाकर की गई निर्मम हत्या
अपराध का तरीका इतना अमानवीय था कि उसने पूरे देश को झकझोर दिया। पुलिस जांच में सामने आया कि जब राहुल और सोनू जंगल में संबंध बना रहे थे, तभी भालेश ने अपने झोले से फेविक्विक निकाला और दोनों के शरीर पर डाल दिया। इससे दोनों एक-दूसरे से बुरी तरह चिपक गए और बचने का कोई रास्ता नहीं रहा। इसके बाद भालेश ने चाकू और पत्थरों से ताबड़तोड़ वार कर दोनों की बेहद नृशंस तरीके से हत्या कर दी।
त्वरित पुलिस कार्रवाई और न्यायिक सख्ती
घटना के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी भालेश को फरार होने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत में त्वरित सुनवाई हुई। अप्रैल 2025 में फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने इस अपराध को “अत्यंत वीभत्स और क्रूर” करार दिया। सजा सुनाते समय न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा कि इस तरह के अपराध में किसी भी प्रकार की नरमी न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगी।
अदालत ने तांत्रिक भालेश को उम्रकैद की सजा के साथ-साथ चार लाख रुपये के जुर्माने से भी दंडित किया। यह फैसला न केवल पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की पुष्टि है, बल्कि समाज के लिए एक कड़ा संदेश भी है कि अंधविश्वास, अवैध संबंधों और निजी स्वार्थ की आड़ में की गई हिंसा को भारतीय कानून कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।












