आईपीआर से नवाचार को मिले नई दिशा — संजय टीटी कॉलेज में राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित।

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जयपुर, 24 अप्रैल। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में जहां ज्ञान, नवाचार और तकनीकी विकास किसी भी राष्ट्र की प्रगति के प्रमुख आधार बन चुके हैं, वहीं बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights – IPR) का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए संजय टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, जयपुर द्वारा इन्क्यूबेशन इनोवेशन काउंसिल (IIC) के तत्वावधान में “बौद्धिक संपदा अधिकार एवं पेटेंट फाइलिंग” विषय पर एक राष्ट्रीय वेबिनार का सफल आयोजन किया गया। यह वेबिनार न केवल विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि नवाचार की दिशा में उन्हें प्रेरित करने वाला भी सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सुनीता भार्गव के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में सम्पन्न हुआ, जबकि डॉ. अल्पना शर्मा ने संयोजक के रूप में अपनी कुशल कार्यशैली और समन्वय क्षमता का परिचय देते हुए पूरे आयोजन को प्रभावी ढंग से संचालित किया। वेबिनार में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 150 से अधिक प्रतिभागियों—जिनमें विद्यार्थी, शोधार्थी एवं संकाय सदस्य शामिल थे—ने ऑनलाइन सहभागिता दर्ज कराई।


इस वेबिनार के मुख्य वक्ता श्री मनीष सोयल, एग्जामिनर (पेटेंट्स एंड डिजाइन), नई दिल्ली रहे, जिन्होंने अपने व्यापक अनुभव और गहन ज्ञान के माध्यम से बौद्धिक संपदा अधिकारों के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अपने व्याख्यान की शुरुआत आईपीआर की मूल अवधारणा से करते हुए बताया कि यह केवल कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति के विचार, नवाचार और सृजनात्मकता की सुरक्षा का माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी युग में यदि किसी के पास कोई नवीन विचार या आविष्कार है, तो उसका संरक्षण करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है, अन्यथा उसका दुरुपयोग होने की संभावना बनी रहती है।
श्री सोयल ने पेटेंट, ट्रेडमार्क और कॉपीराइट जैसे प्रमुख आईपीआर घटकों को सरल और सहज उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेटेंट किसी नए आविष्कार को सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे आविष्कारक को एक निश्चित अवधि तक उस पर विशेष अधिकार प्राप्त होता है। वहीं, ट्रेडमार्क किसी ब्रांड, लोगो या पहचान चिह्न को सुरक्षित करता है, जिससे उपभोक्ताओं के बीच उसकी विशिष्ट पहचान बनी रहती है। कॉपीराइट के अंतर्गत साहित्य, कला, संगीत, फिल्म एवं डिजिटल कंटेंट जैसे सृजनात्मक कार्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।


अपने व्याख्यान को और अधिक रोचक एवं प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने पारंपरिक कला रूपों का भी उल्लेख किया। विशेष रूप से वरली पेंटिंग का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार हमारी सांस्कृतिक धरोहर भी बौद्धिक संपदा के अंतर्गत आती है और उसका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि इन पारंपरिक कलाओं को उचित कानूनी संरक्षण नहीं मिलेगा, तो इनके दुरुपयोग और व्यावसायिक शोषण की आशंका बनी रहती है। इस संदर्भ में उन्होंने भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication – GI) जैसे प्रावधानों का भी उल्लेख किया, जो किसी विशेष क्षेत्र की विशिष्ट कला या उत्पाद को पहचान दिलाने में सहायक होते हैं।
डिजिटल युग में बौद्धिक संपदा अधिकारों की प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए श्री सोयल ने यू-ट्यूब और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि आज के समय में डिजिटल कंटेंट की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। ऐसे में कंटेंट क्रिएटर्स को अपने कार्यों को कॉपीराइट के तहत सुरक्षित करना चाहिए, ताकि उनकी मेहनत और रचनात्मकता का सम्मान बना रहे। उन्होंने यह भी समझाया कि किस प्रकार ट्रेडमार्क और पेटेंट के माध्यम से डिजिटल स्टार्टअप्स और नवाचारों को संरक्षित किया जा सकता है।
वेबिनार के दौरान पेटेंट फाइलिंग की प्रक्रिया पर भी विस्तृत चर्चा की गई। श्री सोयल ने बताया कि पेटेंट प्राप्त करने के लिए आविष्कार का नवीन, उपयोगी और गैर-स्पष्ट (non-obvious) होना आवश्यक है। उन्होंने आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों, परीक्षण (examination) और स्वीकृति के विभिन्न चरणों को विस्तार से समझाया। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि भारत में पेटेंट से जुड़े विभिन्न अधिनियम और नियम किस प्रकार कार्य करते हैं और आविष्कारकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
इस अवसर पर उन्होंने बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में उपलब्ध करियर संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के समय में आईपीआर एक उभरता हुआ क्षेत्र है, जिसमें सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। पेटेंट एग्जामिनर, आईपीआर कंसल्टेंट, लीगल एडवाइजर, रिसर्च एनालिस्ट जैसे कई पद इस क्षेत्र में युवाओं के लिए आकर्षक करियर विकल्प बनकर सामने आ रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे इस क्षेत्र में अपनी रुचि विकसित करें और आवश्यक प्रशिक्षण एवं ज्ञान प्राप्त कर भविष्य में इस क्षेत्र में अपनी पहचान बनाएं।


वेबिनार को अधिक इंटरैक्टिव और सहभागितापूर्ण बनाने के लिए एक क्विज सत्र का भी आयोजन किया गया। इस सत्र में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी समझ का प्रदर्शन किया। इस गतिविधि ने न केवल कार्यक्रम को रोचक बनाया, बल्कि विद्यार्थियों की विषय के प्रति रुचि और समझ को भी सुदृढ़ किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने पेटेंट फाइलिंग, ट्रेडमार्क पंजीकरण, कॉपीराइट संरक्षण एवं नवाचार से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे, जिनका उत्तर मुख्य वक्ता द्वारा सरल, स्पष्ट और प्रभावी ढंग से दिया गया। इस संवादात्मक सत्र ने वेबिनार को और अधिक उपयोगी और ज्ञानवर्धक बना दिया।
इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सुनीता भार्गव ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में केवल ज्ञान प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस ज्ञान को नवाचार में परिवर्तित करना और उसे सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अनुसंधान और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ें तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों के महत्व को समझें। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के वेबिनार विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. अल्पना शर्मा की विशेष भूमिका रही। उनके कुशल समन्वय, प्रबंधन क्षमता और सक्रिय प्रयासों के कारण यह वेबिनार सुव्यवस्थित और प्रभावी ढंग से सम्पन्न हो सका। उन्होंने सभी प्रतिभागियों, वक्ताओं और सहयोगी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहेगा, ताकि विद्यार्थियों को नवीनतम विषयों की जानकारी मिल सके।
अंततः यह वेबिनार न केवल बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि विद्यार्थियों को नवाचार, अनुसंधान और सृजनात्मकता की दिशा में प्रेरित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच भी सिद्ध हुआ। इस प्रकार के आयोजन शिक्षा जगत में नई ऊर्जा का संचार करते हैं और विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने में सहायक होते हैं।

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