(उजला दर्पण सीनियर रिपोर्टर रामगोपाल सिंह उईके
)
देवास/खातेगांव, 29 जून 2025:
देवास जिले की खातेगांव तहसील के ग्राम खीवनी खुर्द में पीढ़ियों से बसे आदिवासी परिवारों को 23 जून को वन विभाग ने बेदखल कर उनके मकान ढहा दिए। इस घटना के विरोध में आज जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) संगठन ने डॉक बंगला मैदान खातेगांव में वृहद महापंचायत का आयोजन किया, जिसमें प्रदेशभर से लगभग 10 हजार कार्यकर्ता शामिल हुए।
महापंचायत का नेतृत्व जयस के राष्ट्रीय संरक्षक एवं मनावर विधायक डॉ. हिरालाल अलावा ने किया। उन्होंने कहा कि आदिवासियों पर इस तरह की अमानवीय कार्रवाई न केवल संविधान विरोधी है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी अवहेलना है। उन्होंने मांग की कि बारिश के मौसम में बेघर किए गए आदिवासियों को तुरंत पुनर्वास और मुआवजा दिया जाए।
डॉ. अलावा ने आरोप लगाया कि भारतीय वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं का उल्लंघन करते हुए वन विभाग ने न तो कोई नोटिस जारी किया, न सुनवाई का अवसर दिया। इस कार्रवाई में राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन ने भी साथ दिया, जो पूरी तरह असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री और अफसर खुद अपने परिवार सहित खुले में रहने को मजबूर हो जाएं, तब उन्हें आदिवासियों की पीड़ा समझ आएगी।
जयस संगठन ने 10 सूत्रीय मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख हैं—
बेदखली अभियान पर तत्काल रोक
प्रत्येक प्रभावित परिवार को 50 लाख का मुआवजा
वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत भूमि अधिकार
दोषी अधिकारियों पर एट्रोसिटी एक्ट के तहत कार्रवाई
पीड़ितों के लिए अस्थाई आवास, भोजन, शिक्षा व स्वास्थ्य की व्यवस्था
महापंचायत में जयस प्रदेश अध्यक्ष रविराज बघेल, प्रवक्ता राहुल जयेश नर्मदा पुरम प्रभारी श्री अखिलेश इरपचे बामणिया, विजय डामोर, राजा धुर्वे, मुन्ना मोरे, बंटी उइके समेत कई जिलों के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
जयस ने चेतावनी दी कि यदि आदिवासियों पर अत्याचार बंद नहीं हुआ तो सड़क से विधानसभा तक आंदोलन होगा।









