विधायक का बंगला डूबा, रीवा के सुशासन की पोल खुली
बीहर के उफान में पहली मंजिल जलमग्न, परिवार दूसरी मंजिल पर रहने को मजबूर; पांच बार के विधायक ने नगर निगम प्रबंधन को दिए जीरो नंबर
रीवा। जिस रीवा को विकास और सुशासन का मॉडल बताकर ढोल पीटा जाता है, उसी रीवा में बारिश ने व्यवस्था की ऐसी परीक्षा ली कि सत्ता के गलियारों तक पानी पहुंच गया। बीहर नदी के उफान और लगातार बारिश के बाद गुढ़ विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ भाजपा विधायक नागेंद्र सिंह का आवास जलमग्न हो गया। पहली मंजिल में पानी भरने के बाद परिवार को दूसरी मंजिल पर रहना पड़ा। हालात इतने खराब बताए जा रहे हैं कि घर तक दूध, सब्जी और जरूरी सामान पहुंचाना भी मुश्किल हो गया।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह कोई सामान्य नागरिक का घर नहीं, बल्कि पांच बार के विधायक का आवास है। जब सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक के घर तक प्रशासन की राहत व्यवस्था नहीं पहुंच पा रही है, तो बीहर किनारे रहने वाले गरीब परिवारों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
विधायक की पुत्रवधू रश्मि राजा सिंह ने भी हालात को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि चारों ओर पानी है और आवश्यक सामग्री पहुंचाने में परेशानी हो रही है। वहीं विधायक नागेंद्र सिंह ने नगर निगम की व्यवस्था और ड्रेनेज सिस्टम पर सवाल उठाते हुए प्रबंधन को 10 में से जीरो नंबर दिए।
दीया तले अंधेरा या सुशासन की असली तस्वीर?
रीवा को विकास की प्रयोगशाला बताने वाले जिम्मेदारों से अब सवाल है—जब शहर के प्रभावशाली लोगों के घरों में पानी घुस रहा है, तो उन बस्तियों का क्या हाल होगा जहां गरीब परिवार वर्षों से जलभराव की मार झेल रहे हैं?
हर वर्ष नालों की सफाई, जलनिकासी और बाढ़ नियंत्रण के दावे किए जाते हैं। बजट खर्च होता है, निरीक्षण होते हैं, बैठकें होती हैं और तस्वीरें भी सामने आती हैं। लेकिन बारिश की कुछ घंटों की मार में यदि पूरा सिस्टम घुटनों पर आ जाए तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर तैयारियां कागज पर थीं या जमीन पर?
बीहर के कैचमेंट पर भी उठे सवाल
बीहर नदी और उसके प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण तथा निर्माण को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। यदि नदी के प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र में निर्माण अथवा अतिक्रमण हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। आखिर किसकी अनुमति से ऐसे निर्माण हुए और जिम्मेदार विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?
यह सिर्फ जलभराव का मामला नहीं है। यह शहर की ड्रेनेज व्यवस्था, नदी संरक्षण और प्रशासनिक तैयारियों की परीक्षा है।
उपमुख्यमंत्री के गृह जिले में सवाल बड़ा है
रीवा उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल का गृह जिला है। ऐसे में यहां की प्रशासनिक व्यवस्था पर उठने वाले सवालों का महत्व और बढ़ जाता है। सवाल सीधा है—जब सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक का बंगला ही पानी में घिर जाए और परिवार को दूसरी मंजिल पर शरण लेनी पड़े, तब आम आदमी किसके भरोसे रहे?
प्रशासन को अब बयान नहीं, जमीन पर कार्रवाई दिखानी होगी। बीहर के कैचमेंट क्षेत्र, नालों और जलनिकासी मार्गों का स्वतंत्र सर्वे कराया जाए, अतिक्रमण की जांच हो और जहां नियम विरुद्ध निर्माण मिले वहां कार्रवाई की जाए।
क्योंकि बारिश ने सिर्फ सड़कें और घर नहीं डुबोए हैं—उसने रीवा के तथाकथित सुशासन के दावों की भी पोल खोल दी है।










