अमृत 2.0 में बड़ा सवाल: ब्रांडेड उपकरणों की जगह लोकल सेंसर लगाने का आरोप

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अमृत 2.0 में बड़ा सवाल: ब्रांडेड उपकरणों की जगह लोकल सेंसर लगाने का आरोप
622 वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में SCADA सिस्टम की गुणवत्ता पर उठे सवाल, महंगे ब्रांड के स्टीकर लगाकर लोकल उपकरण इस्तेमाल करने का दावा
भोपाल। मध्य प्रदेश में घर-घर साफ पानी पहुंचाने के उद्देश्य से अमृत 2.0 योजना के तहत 622 वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार किए जा रहे हैं। इन प्लांट्स में पानी की गुणवत्ता और सप्लाई की निगरानी के लिए लगाए जा रहे SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) सिस्टम को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
दैनिक भास्कर की इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स में सरकार द्वारा निर्धारित अथवा अप्रूव्ड कंपनियों के उपकरणों के स्थान पर कथित तौर पर सस्ते लोकल सेंसर और अन्य उपकरण लगाए गए। जांच के दौरान ऐसे उपकरणों पर महंगी और स्वीकृत ब्रांडेड कंपनियों के स्टीकर लगे होने का भी दावा किया गया है।
SCADA सिस्टम प्लांट में पानी की गुणवत्ता, दबाव, प्रवाह और सप्लाई जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं की ऑटोमैटिक मॉनिटरिंग और डेटा रिकॉर्डिंग में भूमिका निभाता है। ऐसे में इसके सेंसर और उपकरणों की गुणवत्ता सीधे सिस्टम की निगरानी क्षमता से जुड़ी होती है।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इन उपकरणों को PDMC और संबंधित इंजीनियरों द्वारा पास किया गया। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है कि स्वीकृत ब्रांड के स्थान पर दूसरे उपकरण लगाए गए और उन्हें ब्रांडेड उपकरण के रूप में स्वीकार किया गया, तो यह सरकारी राशि के उपयोग और परियोजना की गुणवत्ता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सबसे महत्वपूर्ण चिंता यह है कि पेयजल से जुड़ी परियोजना में निगरानी प्रणाली ही मानकों के अनुरूप नहीं रही तो पानी की गुणवत्ता और सप्लाई की वास्तविक स्थिति की निगरानी कितनी विश्वसनीय होगी? अब पूरे मामले में तकनीकी जांच, उपकरणों के बिल-सप्लाई रिकॉर्ड, ब्रांड/मॉडल की पुष्टि और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण होगी।
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