24 घंटे में रिश्वतखोरी के आरोपों पर तहसील का बाबू निलंबित, कलेक्टर ने दिखाई सख्ती

---Advertisement---

24 घंटे में रिश्वतखोरी के आरोपों पर तहसील का बाबू निलंबित, कलेक्टर ने दिखाई सख्ती

जमानत के नाम पर 3 हजार रुपए मांगने और लेने का आरोप, वकीलों के हंगामे के बाद कलेक्टर ने बैठाई थी जांच; कर्मचारी ने आरोपों से किया इनकार

राजगढ़। सरकारी कार्यालयों में आम नागरिकों से जुड़े कार्यों के नाम पर कथित रिश्वतखोरी के मामले में राजगढ़ कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तहसील राजगढ़ में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 प्रवाचक राहुल वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कर्मचारी पर एक व्यक्ति से जमानत की प्रक्रिया के दौरान 3 हजार रुपए मांगने और लेने का आरोप लगा था। मामले में अधिवक्ताओं द्वारा विरोध और शिकायत किए जाने के बाद कलेक्टर ने जांच के निर्देश दिए थे। अब 24 घंटे के भीतर निलंबन आदेश जारी होने से प्रशासनिक महकमे में हलचल है।

**जमानत निरस्त कराने की धमकी देने का आरोप**

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता संदीप सरावत ने शिकायत प्रस्तुत कर आरोप लगाया था कि आवेदक गिरधारी तंवर के दामाद सांवरिया पिता मोरसिंह को राजगढ़ पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 170 के तहत गिरफ्तार कर कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया था। इसी दौरान तहसील कार्यालय में पदस्थ प्रवाचक राहुल वर्मा द्वारा कथित तौर पर 3 हजार रुपए की मांग की गई। आरोप है कि राशि नहीं देने पर आरोपी की जमानत निरस्त होने की बात भी कही गई।

**वकीलों के विरोध के बाद बढ़ा मामला**

मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया, जब अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपर कलेक्टर प्रतापसिंह चौहान के कक्ष में विरोध दर्ज कराया। बार एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष अविनाश दशेरिया सहित अन्य अधिवक्ताओं ने कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि कार्यालयों में इस प्रकार की कथित मनमानी पर अंकुश नहीं लगाया गया तो आंदोलन किया जाएगा।

विरोध के दौरान अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि 3 हजार रुपए की राशि अलग-अलग मूल्यवर्ग के नोटों में ली गई थी। उन्होंने संबंधित कर्मचारी से राशि की जांच कराने की मांग भी की। बाद में बंद कक्ष में संबंधित पक्षकार को कथित तौर पर 3 हजार रुपए वापस किए जाने की बात सामने आई।

**कर्मचारी ने लिखित जवाब में आरोपों को नकारा**

मामले में राहुल वर्मा से स्पष्टीकरण मांगा गया था। उन्होंने अपने लिखित जवाब में रिश्वत मांगने और राशि लेने के आरोपों से इनकार किया। हालांकि, कलेक्टर ने उपलब्ध अभिलेखों और प्रकरण की प्रारंभिक समीक्षा के आधार पर प्रथम दृष्टया इसे पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही एवं मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम-3 के विपरीत माना।

इसी आधार पर राहुल वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश जारी किए गए।

**प्रशासनिक सख्ती का संदेश**

इस कार्रवाई को सरकारी कार्यालयों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, निलंबन प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई है और आरोपों की अंतिम पुष्टि विभागीय जांच एवं नियमानुसार प्रक्रिया के बाद ही होगी।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment