₹30 हजार में नामांतरण का सौदा, ₹10 हजार में फिक्स हुई बात; ₹5 हजार की पहली किस्त लेते ही लोकायुक्त के जाल में फंसा पटवारी—अब जबलपुर के राजस्व निरीक्षकों के ‘वसूली खेल’ पर नजर!
भिंड की लोकायुक्त कार्रवाई ने खोला रिश्वतखोरी का एक और चेहरा; अब जबलपुर के राजस्व निरीक्षकों के कथित वसूली तंत्र पर निगाह, जल्द रडार पर आने की चर्चा
भिंड/जबलपुर। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में नामांतरण के बदले रिश्वत लेते पटवारी के लोकायुक्त के हत्थे चढ़ने के बाद अब राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्वालियर लोकायुक्त की टीम ने मेहगांव क्षेत्र के पटवारी संजय बघेल को ₹5 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोप है कि किसान की पत्नी के नाम खरीदी गई जमीन के नामांतरण के लिए पटवारी ने पहले ₹30 हजार की मांग की थी। विरोध के बाद सौदा ₹10 हजार में तय हुआ और पहली किस्त के रूप में ₹5 हजार लेते ही लोकायुक्त ने उसे दबोच लिया।
भिंड की यह कार्रवाई सामने आने के बाद अब चर्चा का रुख जबलपुर के राजस्व निरीक्षकों (R.I.) की ओर भी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जबलपुर में कुछ राजस्व निरीक्षकों पर कथित तौर पर निजी व्यक्तियों को माध्यम बनाकर वसूली कराने के आरोप लगाए जा रहे हैं। बताया जाता है कि ये निजी व्यक्ति राजस्व संबंधी कार्यों के नाम पर लोगों से संपर्क करते हैं और कथित रूप से रकम की मांग करते हैं।
पटवारी के बाद अब R.I. पर नजर?
सूत्रों का दावा है कि कुछ राजस्व निरीक्षक अपने कथित ‘प्राइवेट लोगों’ के जरिए वसूली का तंत्र संचालित कर रहे हैं। आरोप यह भी है कि लोगों पर रकम देने के लिए दबाव बनाया जाता है और राजस्व संबंधी कार्यों को लेकर अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
भिंड में लोकायुक्त की कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि रिश्वत के खेल में शिकायत और सत्यापन के बाद कार्रवाई संभव है। ऐसे में जबलपुर के राजस्व निरीक्षकों को लेकर सामने आ रही शिकायतों और आरोपों पर भी निगाहें टिक गई हैं।
जल्द रडार पर आने की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, जबलपुर के कुछ राजस्व निरीक्षक जल्द ही जांच एजेंसियों के रडार पर आ सकते हैं। खासतौर पर निजी व्यक्तियों के माध्यम से कथित वसूली, राजस्व कार्यों के बदले रकम मांगने और लोगों पर दबाव बनाने से जुड़े मामलों की जानकारी जुटाए जाने की चर्चा है।
अब सवाल बड़ा है—भिंड में पटवारी की गिरफ्तारी के बाद क्या जबलपुर के कथित ‘वसूली तंत्र’ की भी जांच की जाएगी? क्या जांच की आंच उन निजी लोगों तक पहुंचेगी, जिनके जरिए कथित तौर पर वसूली का खेल चलाए जाने के आरोप हैं?
भिंड में पटवारी पकड़ा गया, अब नजर जबलपुर के R.I. पर—क्या खुलेगा राजस्व विभाग के कथित ‘प्राइवेट वसूली तंत्र’ का राज?










