सतना में पटवारियों की ‘कलाकारी’ पर सवाल, बड़ी कुर्सी कब जागेगी
छतरपुर में फौती नामांतरण के खसरे में कथित अवैध प्रविष्टि पर पटवारी निलंबित, 15 दिन में जांच के आदेश; सतना में भी राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े मामलों पर उठ रहे गंभीर सवाल
सतना। छतरपुर में राजस्व रिकॉर्ड में कथित अनियमितता सामने आने के बाद तत्कालीन पटवारी अमित कुमार सक्सेना को निलंबित कर तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया गया है। आरोप है कि बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के फौती नामांतरण खसरा में प्रविष्टि की गई तथा आरसीएमएस पोर्टल पर अन्य ग्राम के प्रकरण क्रमांक का उपयोग कर कथित रूप से कूटरचित प्रविष्टि की गई।
छतरपुर प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पटवारी की पदस्थापना अवधि के दौरान न्यायालयीन प्रकरणों और वेबजीआईएस पर दर्ज प्रविष्टियों की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। जांच दल को 15 दिन में प्रतिवेदन प्रस्तुत करना है।
अब यही सवाल सतना में भी उठ रहा है—क्या यहां राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े मामलों की इसी तरह निष्पक्ष और व्यापक जांच होगी?
सतना में सरकारी और निजी भूमि के खसरा रिकॉर्ड में कथित हेरफेर, भूमि के टुकड़े किए जाने और प्रविष्टियों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कुछ मामलों के उजागर होने के बाद शिकायतें और जनसुनवाई तक तो मामला पहुंचता है, लेकिन आरोप है कि कार्रवाई की गति अक्सर वहीं थम जाती है।
सबसे बड़ा सवाल वेंकट क्रमांक-1 की सरकारी भूमि के खसरा नंबर 12 को लेकर उठाया जा रहा है। आरोप है कि सरकारी भूमि को कथित रूप से टुकड़ों में बांटने और रिकॉर्ड में प्रविष्टियों को लेकर गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। यदि आरोप सही हैं तो यह केवल किसी एक पटवारी की जिम्मेदारी का विषय नहीं, बल्कि पूरे राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
चाय खत्म, मामला खत्म?
सतना में कार्रवाई को लेकर एक और सवाल राजनीतिक हस्तक्षेप की चर्चाओं से जुड़ा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि मामला सुर्खियों में आते ही कुछ लोग सक्रिय होते हैं, चाय पर चर्चा होती है और कुछ समय बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
यदि ऐसा नहीं है तो प्रशासन को सामने आकर स्पष्ट करना चाहिए कि शिकायतों पर अब तक क्या जांच हुई, किन अधिकारियों ने रिकॉर्ड की जांच की और दोषी पाए जाने पर क्या कार्रवाई की गई?
अधिकारियों की नेतागिरी या नेताओं की अधिकारीगिरी?
जनता का सवाल सीधा है—यदि राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर के आरोप निराधार हैं तो जांच से दूध का दूध और पानी का पानी क्यों नहीं किया जाता? और यदि प्रथम दृष्टया गड़बड़ी मिलती है तो कार्रवाई में देरी क्यों?
छतरपुर में प्रशासन ने एक पटवारी को निलंबित कर जांच बैठा दी। अब सतना में भी निगाहें कलेक्टर की कार्रवाई पर हैं।
क्या वेंकट क्रमांक-1 की सरकारी भूमि के खसरा नंबर 12 की पूरी फाइल खुलेगी?
क्या संबंधित अवधि की सभी ऑनलाइन और न्यायालयीन प्रविष्टियों का ऑडिट होगा?
क्या जिम्मेदारी तय होगी?
या जनसुनवाई में कार्रवाई का आश्वासन देकर मामला फिर फाइलों में दब जाएगा?
- सतना प्रशासन के सामने अब सवाल केवल एक भूमि का नहीं, बल्कि राजस्व रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और प्रशासनिक जवाबदेही का है।










