9 लाख की स्कूल फीस पर हाईकोर्ट का सवाल, 51 हजार वेतन वाले माइनिंग अधिकारी से पूछा—इतनी फीस कैसे जमा हुई?
ग्वालियर। बिलौआ क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान ग्वालियर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अधिकारियों से तीखे सवाल किए। मामले की सुनवाई के दौरान ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान करीब ढाई घंटे तक अदालत में मौजूद रहीं और उनसे मामले से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत पूछताछ की गई।
सुनवाई के दौरान प्रभारी माइनिंग अधिकारी पंकजध्वज मिश्रा से भी अदालत ने कई सवाल किए। न्यायालय ने पहले उनके बेटे की सिंधिया स्कूल में पढ़ाई और फीस के संबंध में जानकारी ली। इसके बाद उनकी मासिक आय के बारे में पूछा गया।
अधिकारी ने अदालत को बताया कि उनकी मासिक सैलरी करीब 51 हजार रुपये है। इस पर न्यायालय ने सवाल किया कि जब मासिक वेतन 51 हजार रुपये है, तो बेटे की करीब 9 लाख रुपये की स्कूल फीस कैसे जमा की गई?
अदालत के इस सवाल पर माइनिंग अधिकारी ने जवाब दिया कि उनके बेटे की पढ़ाई का खर्च उसके मामा उठाते हैं। सुनवाई के दौरान अवैध खनन से जुड़े मामले में अधिकारियों की भूमिका और उनके द्वारा दी गई जानकारी को लेकर भी न्यायालय ने गंभीरता दिखाई।
बिलौआ क्षेत्र में अवैध खनन के आरोपों को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब अधिकारियों के जवाब और अदालत की आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।










