एमपी का ‘सीरियल किलर’: बिल्ली रास्ता काटती तो टाल देता था हत्या का प्लान, इंजीनियर बनने का सपना देखने वाला बना हैवान, 17 हत्याओं का आरोप
मध्य प्रदेश के कुख्यात अपराधी सरमन शिवहरे की अपराध कथा कई शहरों में हुई संगीन वारदातों से जुड़ी रही है। वर्ष 2007 से 2011 के बीच इंदौर, ग्वालियर, सतना, पन्ना, जबलपुर और भोपाल सहित कई शहरों में उसके खिलाफ 22 से अधिक आपराधिक मामले सामने आए। उस पर 17 से अधिक हत्याओं के आरोप भी लगे, जिसने पुलिस और आम लोगों के बीच उसकी दहशत बढ़ा दी थी।
बताया जाता है कि पन्ना निवासी सरमन पढ़ाई के दौरान इंजीनियर बनने का सपना देखता था, लेकिन कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं कर सका। इसके बाद उसने मार्केटिंग का काम शुरू किया और धीरे-धीरे अपराध की दुनिया में प्रवेश कर गया। शुरुआत मंदिरों से सिक्के चोरी करने जैसी छोटी वारदातों से हुई और आगे चलकर मामला लूट तथा हत्या तक पहुंच गया।
10 सितंबर 2007 को पन्ना में मोटरसाइकिल से जा रहे दो भाइयों की हत्या कर लूट की वारदात का मामला सामने आया। इसके बाद सतना में गोलीकांड और पन्ना में हीरा व्यापारी की हत्या जैसी घटनाओं में भी उसका नाम सामने आया। वर्ष 2010 में इंदौर में डॉक्टर और उनके घरेलू सहायक की हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था।
पुलिस जांच आगे बढ़ी तो अलग-अलग जिलों में हुई कई वारदातों की कड़ियां सरमन से जुड़ने लगीं। पुलिस के मुताबिक वह वारदात से पहले संभावित शिकार की कई दिनों तक रेकी करता था और कई बार मोबाइल फोन तक इस्तेमाल नहीं करता था। मौका मिलते ही हमला कर फरार हो जाना उसकी कथित कार्यशैली का हिस्सा था।
उसके निशाने पर कारोबारी, ज्वेलरी से जुड़े लोग और नकदी लेकर चलने वाले लोग बताए जाते हैं। यह भी दावा किया गया कि वह अंधविश्वास में बिल्ली के रास्ता काटने को अशुभ मानता था और ऐसी स्थिति में हत्या की योजना टाल देता था। पूछताछ के दौरान उसने कई वारदातों के संबंध में जानकारी दी थी।
सरमन शिवहरे की अपराध कथा यह बताती है कि किस तरह अलग-अलग शहरों में हुई वारदातों की कड़ियां वर्षों बाद एक ही आरोपी तक पहुंचीं। हालांकि हत्या और अन्य अपराधों से जुड़े आरोपों को संबंधित न्यायिक रिकॉर्ड और पुलिस अभिलेखों के संदर्भ में ही अंतिम रूप से देखा जाना चाहिए।










