बाप की हत्या को बना दिया एक्सीडेंट, मां-बेटे की साजिश का पर्दाफाश — पोस्टमॉर्टम की एक लाइन ने हिला दी पुलिस
सतना रामपुर बाघेलान। मार्च में उमरी शिराजी में जो दिखा वो हादसा था, लेकिन जो सच था — वो एक खौफनाक कत्ल। रामपुर पुलिस के सामने जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आई, तो उसमें लिखी एक लाइन ने पूरे सिस्टम की नींद उड़ा दी — “मौत मानव द्वारा हमले से हुई।”
अब तक जिसे पुलिस सड़क दुर्घटना मान रही थी, वो दरअसल घर के अंदर रची गई खून की साजिश थी। धीरेन्द्र सिंह परिहार की हत्या करने वाला कोई बाहरी नहीं, उसका खुद का बेटा निकला — आदर्श सिंह उर्फ निखिल। और सबसे बड़ा झटका — इस जुर्म में उसकी मां संतोष सिंह भी शामिल थी, जिसने कत्ल के सबूत छिपाए।
कत्ल का खेल: घर के भीतर रचा गया, हादसे का नकाब पहनाया गया
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद पुलिस ने पूरे मामले को नए सिरे से खंगाला — सर्विलांस, मुखबिरी और बारीकी से जांच के बाद शक यकीन में बदला। बेटे ने पिता की हत्या की, और मां ने मामले को एक्सीडेंट बताकर बचाने की कोशिश की।
मासूमियत की आड़ में साजिश — बेटे की मानसिक स्थिति को ढाल बनाया गया
पुलिस को शुरू से शक था, लेकिन हर बार जवाब में यही कहा गया — “बेटा मानसिक रूप से ठीक नहीं है।” अब सवाल ये है — क्या मानसिक रूप से अस्थिर इंसान इतनी साफ-सुथरी साजिश रच सकता है? या फिर ये “बीमारी” सिर्फ कानून से बचने का बहाना थी?
सच अब सलाखों के पीछे है
पुलिस ने आदर्श और संतोष — दोनों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर दिया है। लेकिन इस पूरे मामले ने एक बार फिर ये साबित कर दिया कि अपराध जब घर के भीतर जन्म ले, तो वो सबसे ज़्यादा खतरनाक होता है।
रामपुर पुलिस की मेहनत और पोस्टमॉर्टम की एक लाइन ने वो कर दिखाया, जो कई बार जांच एजेंसियां महीनों में नहीं कर पातीं — एक अंधे कत्ल को उजाला दे दिया।









