उजला दर्पण समाचार पत्र के खबर का असर,जन-विश्वास अभियान का बदला रुख: खबर की जानकारी लेकर ADM शैलेन्द्र सिंह सक्रिय, कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार और ASP डॉ. आयुष जाखड़ ने रांझी तहसील का किया औचक निरीक्षण

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जन-विश्वास अभियान का बदला रुख: खबर की जानकारी लेकर ADM शैलेन्द्र सिंह , कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार और ASP डॉ. आयुष जाखड़ ने रांझी तहसील का किया औचक निरीक्षण

74 वर्षीय बुजुर्ग के भटकने की खबर के बाद प्रशासन हरकत में, राजस्व अमले को फटकार; पेट्रोल पंप के तीन नोजल सील, संजीवनी क्लीनिक के कर्मचारियों का वेतन रोकने के निर्देश

जबलपुर। मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान का उद्देश्य जनता और प्रशासन के बीच विश्वास की दूरी कम करना है, लेकिन रांझी तहसील में 74 वर्षीय बुजुर्ग के कथित रूप से अपनी समस्या के समाधान के लिए दर-दर भटकने की खबर ने इसी अभियान की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए थे। उजला दर्पण में खबर प्रकाशित होने के बाद मामले ने प्रशासन का ध्यान खींचा और अभियान का रुख रांझी तहसील की ओर हुआ।

 

खबर की जानकारी लेकर अपर कलेक्टर शैलेन्द्र सिंह ने मामले की जानकारी ली। इसके बाद मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. आयुष जाखड़ सहित प्रशासनिक अमला रांझी क्षेत्र के विभिन्न शासकीय संस्थानों के औचक निरीक्षण पर पहुंचा।

 

रांझी तहसील पहुंचकर अधिकारियों ने राजस्व प्रकरणों की स्थिति, लंबित मामलों, सीएम हेल्पलाइन शिकायतों, अतिक्रमण संबंधी शिकायतों और आम नागरिकों से जुड़ी समस्याओं की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान राजस्व अमले की कार्यप्रणाली को लेकर कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई और लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए।

 

मंच पर जन-विश्वास, तहसील में ‘फाइल-विश्वास’?

 

सरकार जन-विश्वास अभियान के माध्यम से जनता को यह भरोसा दिलाना चाहती है कि प्रशासन उसकी समस्याओं को गंभीरता से सुनेगा और उनका समयबद्ध निराकरण करेगा।

 

लेकिन सवाल यह है कि यदि 74 वर्षीय बुजुर्ग को भी अपनी समस्या लेकर तहसील के चक्कर लगाने पड़ें, तो आखिर जन-विश्वास की असली परीक्षा कहां होगी?

 

जनता के बीच जाकर संवाद करना अच्छी पहल है, लेकिन जन-विश्वास तभी मजबूत होगा जब सरकारी कार्यालय में पहुंचने वाला नागरिक अपनी समस्या के समाधान के लिए एक टेबल से दूसरी टेबल और एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी की चौखट तक भटकने को मजबूर न हो।

 

74 साल की उम्र में यदि किसी बुजुर्ग को अपनी समस्या के निराकरण के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ें, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति की परेशानी नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल है।

 

खबर के बाद बदला अभियान का रुख, रांझी तहसील पहुंचा प्रशासन

 

रांझी तहसील से जुड़ी खबर सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर मामले की जानकारी ली गई। इसके बाद मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत रांझी क्षेत्र में व्यापक निरीक्षण किया गया।

 

कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के नेतृत्व में अपर कलेक्टर शैलेन्द्र सिंह, निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. आयुष जाखड़ सहित अधिकारियों ने विभिन्न शासकीय संस्थानों की व्यवस्थाएं परखीं।

 

यानी जिस रांझी तहसील को लेकर जनता की परेशानी और 74 वर्षीय बुजुर्ग के भटकने का सवाल उठाया गया था, वही तहसील अब प्रशासनिक निरीक्षण के केंद्र में आ गई।

 

राजस्व प्रकरणों पर कलेक्टर की सख्ती

 

तहसील कार्यालय में कलेक्टर ने सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा, नक्शा बटांकन, खसरा सुधार, शासकीय भूमि पर अतिक्रमण तथा पट्टे की भूमि पर अवैध निर्माण से जुड़े प्रकरणों की समीक्षा की।

 

सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों की जानकारी लेते हुए शेष शिकायतों का संतुष्टिपूर्ण निराकरण करने के निर्देश दिए गए। तहसील न्यायालय से निराकृत प्रकरणों की भी समीक्षा की गई।

 

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि राजस्व के लंबित प्रकरणों का जल्द निराकरण किया जाए और आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। बकाया राजस्व की वसूली में भी सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए।

 

निरीक्षण के दौरान राजस्व अमले की कार्यप्रणाली और लंबित मामलों को लेकर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए जवाबदेही के साथ काम करने के निर्देश दिए।

 

पनेहरा पेट्रोल पंप पर कम पेट्रोल की डिलीवरी, तीन नोजल सील

 

मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत पनेहरा स्थित पेट्रोल पंप का भी निरीक्षण किया गया। कलेक्टर ने पेट्रोल-डीजल की डिस्पेंसिंग मशीनों के कट-ऑफ सिस्टम, शून्य रीसेट प्रक्रिया और डिलीवरी दर की मौके पर जांच कराई।

 

5 लीटर के मानक मापक जार में ईंधन भरवाकर मशीन की रीडिंग और वास्तविक मात्रा का सत्यापन किया गया। पेट्रोल-डीजल की शुद्धता की जांच भी कराई गई।

 

जांच में तीन नोजलों से पेट्रोल की मात्रा कम पाई गई। कलेक्टर के निर्देश पर तीनों नोजल तत्काल सील कर दिए गए।

 

इन नोजलों का हाल ही में 24 अगस्त को सत्यापन करने वाले नाप-तौल निरीक्षक सचिन कुमार सोनी को भी कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।

 

कलेक्टर ने पेट्रोल पंप का स्टॉक रजिस्टर, दैनिक बिक्री रिकॉर्ड और नाप-तौल संबंधी दस्तावेज भी जांचे तथा उपभोक्ताओं को पारदर्शी सेवा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

 

डॉमिनोज फूड सेंटर पर भी कार्रवाई के निर्देश

 

पेट्रोल पंप परिसर में संचालित डॉमिनोज फूड सेंटर की जांच के दौरान एफएसएसआई लाइसेंस और अन्य अनुमति संबंधी दस्तावेज मौके पर प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

 

कलेक्टर ने खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने तथा संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

 

संजीवनी क्लीनिक में रिकॉर्ड में गड़बड़ी, पूरे स्टाफ का वेतन रोकने के निर्देश

 

गणेशगंज रांझी स्थित मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर का भी निरीक्षण किया गया।

 

कलेक्टर ने मरीजों के रिकॉर्ड, दैनिक कामकाज और एएनसी पंजीयन से संबंधित रजिस्टरों की जांच की। इस दौरान रजिस्टर में बीच का रिकॉर्ड गायब मिला और प्रविष्टियों के क्रमांक में भी गड़बड़ी पाई गई।

 

कलेक्टर ने रजिस्टर में दर्ज मरीजों के नंबरों पर फोन लगवाकर यह भी जाना कि उन्हें क्लीनिक में किस प्रकार की स्वास्थ्य सुविधा और दवाइयां मिलीं। कुछ मरीजों ने उचित इलाज नहीं मिलने की जानकारी दी।

 

इस पर कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए क्लीनिक में पदस्थ सभी कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने और सभी का वेतन रोकने के निर्देश दिए।

 

गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन में भी व्यवस्था सुधारने के निर्देश

 

रांझी स्थित गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन के निरीक्षण में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था देखी गई। कलेक्टर ने गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने के निर्देश दिए।

 

स्टेशन परिसर में खड़े पुराने और कबाड़ हो चुके वाहनों का नियमानुसार निपटारा करने के निर्देश भी दिए गए।

 

विद्युत सेवा केंद्र में उपभोक्ताओं की शिकायतों पर जोर

 

विद्युत सेवा केंद्र रांझी के निरीक्षण के दौरान उपभोक्ताओं को मिलने वाली बिजली संबंधी सुविधाओं की जानकारी ली गई। कलेक्टर ने बिजली आपूर्ति से संबंधित शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

 

अब असली परीक्षा निरीक्षण के बाद

 

रांझी में हुए इस औचक निरीक्षण से प्रशासन ने निश्चित तौर पर सख्ती का संदेश दिया है। लेकिन जन-विश्वास अभियान की असली सफलता अब निरीक्षण के बाद दिखाई देगी।

 

क्या 74 वर्षीय बुजुर्ग को अब अपनी समस्या के लिए दोबारा सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ेंगे?

 

क्या लंबित राजस्व प्रकरण समयसीमा में निपटेंगे?

 

क्या सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का वास्तविक समाधान होगा?

 

क्या राजस्व अमले की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी?

 

और क्या आम नागरिक को अधिकारी की चौखट पर पहुंचने के बाद सम्मानपूर्वक और समयबद्ध समाधान मिलेगा?

 

जन-विश्वास निरीक्षण से नहीं, व्यवस्था बदलने से बनेगा

 

जन-विश्वास केवल अभियान का नाम नहीं है। यह उस नागरिक के अनुभव से तय होगा जो अपनी समस्या लेकर सरकारी कार्यालय पहुंचता है।

 

विश्वास तब बनेगा, जब 74 वर्षीय बुजुर्ग को अपनी समस्या के लिए बार-बार भटकना न पड़े।

 

विश्वास तब बनेगा, जब राजस्व की फाइलें समय पर चलें।

 

विश्वास तब बनेगा, जब शिकायत का निराकरण कागज पर नहीं, जमीन पर दिखाई दे।

 

और सबसे महत्वपूर्ण—

 

सरकारी कार्यालय की चौखट पर पहुंचा नागरिक खुद को ‘फरियादी’ नहीं, अपने अधिकारों वाला नागरिक महसूस करे।

रांझी में कलेक्टर, अपर कलेक्टर, निगम आयुक्त और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक का औचक निरीक्षण प्रशासन की सक्रियता का संकेत जरूर है। अब जनता की नजर इस बात पर रहेगी कि आज की फटकार और कार्रवाई आने वाले दिनों में व्यवस्था में कितना बदलाव लाती है।

क्योंकि सवाल अभी भी कायम है—

“कैसा यह जन-विश्वास अभियान, जब जनता का विश्वास सरकारी चौखट पर ही परीक्षा देता रहे?”

और उस 74 वर्षीय बुजुर्ग का विश्वास आखिर कब जुड़ेगा?

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