जबलपुर। नगर निगम जबलपुर में ठेका एजेंसी Isha Professional Security के माध्यम से कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों एवं अन्य कर्मचारियों ने कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले आठ महीनों से वेतन लगातार एक से दो महीने की देरी से मिल रहा है, जिससे उनके सामने परिवार का पालन-पोषण करना तक मुश्किल हो गया है। कर्मचारियों का कहना है कि अप्रैल माह का वेतन मिलने के बाद अब तक मई माह का भुगतान भी नहीं हुआ है।
कर्मचारियों के अनुसार हर बार वेतन में देरी का कारण अधिकारियों द्वारा भुगतान संबंधी फाइलों पर समय से हस्ताक्षर नहीं होना बताया जाता है। उनका कहना है कि यदि प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी हो रही है तो उसकी सजा उन कर्मचारियों को क्यों भुगतनी पड़ रही है, जो प्रतिदिन अपनी जिम्मेदारियां पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि पिछले छह माह से उनके भविष्य निधि (PF) की राशि जमा नहीं की गई, जबकि एक वर्ष से अधिक समय से ESIC का अंशदान भी जमा नहीं हो रहा है। इससे कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और भविष्य दोनों पर संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा दो माह का एरियर भी निर्धारित राशि से कम दिए जाने का आरोप लगाया गया है।
सबसे बड़ा आरोप यह है कि कंप्यूटर ऑपरेटरों से तकनीकी और जिम्मेदारी वाले कार्य लिए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें कलेक्टर द्वारा निर्धारित दर से भी कम तथा अनस्किल्ड श्रेणी के अनुसार वेतन दिया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यह श्रम नियमों के विपरीत है।
कर्मचारियों ने यह भी बताया कि उन्हें कैजुअल लीव (CL) की सुविधा नहीं मिलती। यदि तकनीकी खराबी के कारण ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं हो पाती है तो बिना किसी जांच के सीधे वेतन काट लिया जाता है। कर्मचारियों का कहना है कि सिस्टम की खराबी का खामियाजा भी उन्हें ही भुगतना पड़ता है।
पीड़ित कर्मचारियों का कहना है कि वे केवल नियमित कार्यालयीन कार्य ही नहीं करते, बल्कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों, SIR ड्यूटी, जनगणना, राष्ट्रपति एवं अन्य वीवीआईपी प्रोटोकॉल ड्यूटी, चुनाव संबंधी कार्यों तथा राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं में भी लगातार अपनी सेवाएं देते हैं। कई बार अवकाश के दिनों और निर्धारित समय के बाद भी काम कराया जाता है, लेकिन किसी भी प्रकार का ओवरटाइम या अतिरिक्त मानदेय नहीं दिया जाता।
कर्मचारियों का यह भी आरोप है कि वेतन भुगतान में लगातार हो रही देरी को लेकर कर्मचारियों के बीच कई तरह की चर्चाएं हैं। कुछ कर्मचारियों ने आशंका जताई है कि भुगतान प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब के पीछे अनुचित लाभ की संभावना हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और कर्मचारी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
नगर निगम के विभिन्न विभागों में कार्यरत इन कर्मचारियों का कहना है कि समय पर वेतन नहीं मिलने से बच्चों की स्कूल फीस, मकान का किराया, बैंक की किस्तें और घर का रोजमर्रा का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद वे शासन और प्रशासन के महत्वपूर्ण कार्यों को पूरी जिम्मेदारी से निभा रहे हैं।
अब कर्मचारियों ने नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ठेका एजेंसी की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाए तथा समय पर वेतन, लंबित PF एवं ESIC जमा कराने, कलेक्टर दर के अनुसार वेतन देने और ओवरटाइम भुगतान सुनिश्चित करने के लिए तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार की योजनाओं को धरातल पर लागू करने वाले ये कर्मचारी आखिर कब तक अपने ही अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहेंगे? क्या नगर निगम प्रशासन और आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार इन गंभीर आरोपों का संज्ञान लेकर ठेका कर्मचारियों को न्याय दिलाएंगे, या फिर उनकी आवाज फाइलों में ही दबकर रह जाएगी?









