धारण अधिकार नियम के तहत नया पट्टा पाने 74 वर्षीय बुजुर्ग की फरियाद कब सुनेगा प्रशासन?
रांझी तहसील में वर्षों से भटकने का आरोप, राजस्व निरीक्षकों पर ₹25 हजार रिश्वत लेने का गंभीर आरोप; CM हेल्पलाइन पर 3-4 शिकायतों के बाद भी 7-8 माह से निराकरण नहीं
जबलपुर। स्थाई पट्टा भूमि के नवीनीकरण और नवीनीकृत पट्टों के नामांतरण की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए जिला प्रशासन ने एक पेज का सरल आवेदन पत्र तैयार किया है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने राजस्व अमले को घर-घर पहुंचकर आवेदन भरवाने और लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन रांझी तहसील से सामने आया 74 वर्षीय बुजुर्ग का मामला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
बताया गया है कि 74 वर्षीय बुजुर्ग ने धारण अधिकार नियम के तहत नया पट्टा प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। नजूल भूमि पर उनका मकान है और पट्टा बनवाने के लिए वे पिछले एक-दो वर्षों से राजस्व कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। उम्रदराज होने के साथ स्वास्थ्य ठीक नहीं रहने के कारण उनके लिए बार-बार तहसील कार्यालय जाना भी मुश्किल है। इसके बावजूद उनका प्रकरण आज तक निराकरण की प्रतीक्षा में है।
मामला और गंभीर इसलिए है क्योंकि बुजुर्ग ने संबंधित राजस्व निरीक्षकों पर करीब ₹25 हजार रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है। आरोप की वास्तविकता जांच का विषय है, लेकिन यदि यह आरोप सत्य पाया जाता है तो यह केवल एक बुजुर्ग की पीड़ा नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था में व्याप्त अनियमितता पर गंभीर प्रश्न होगा।
CM हेल्पलाइन पर 3-4 बार शिकायत, फिर भी समाधान नहीं
बुजुर्ग अपनी समस्या को लेकर CM हेल्पलाइन पर तीन से चार बार शिकायत भी कर चुके हैं। बताया गया है कि करीब 7-8 महीने बीत जाने के बावजूद शिकायत का अपेक्षित निराकरण नहीं हुआ।
सवाल यह है कि जब एक 74 वर्षीय बुजुर्ग तहसील से लेकर CM हेल्पलाइन तक अपनी फरियाद पहुंचा चुका है, तो आखिर उसकी समस्या किस स्तर पर अटकी हुई है?
RTI लगाकर मांगी जानकारी, फिर भी इंतजार
अपने प्रकरण की वास्तविक स्थिति जानने के लिए बुजुर्ग ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारी भी मांगी, लेकिन उन्हें अपेक्षित जानकारी नहीं मिलने की बात सामने आई है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है—जिस बुजुर्ग को अपने अधिकार के तहत पट्टा चाहिए, उसे अपना अधिकार पाने के लिए आखिर कितने दरवाजे खटखटाने पड़ेंगे?
कलेक्टर गठित करें जांच समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह से मांग है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए जांच समिति गठित की जाए। जांच समिति बुजुर्ग के घर पहुंचकर उनसे आमने-सामने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ले और उनके द्वारा लगाए गए ₹25 हजार रिश्वत के आरोपों की भी जांच करे।
जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि धारण अधिकार नियम के तहत नया पट्टा देने के लिए किए गए आवेदन पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, फाइल किस स्तर पर लंबित रही, CM हेल्पलाइन की 3-4 शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और RTI में मांगी गई जानकारी क्यों नहीं दी गई।
अपर कलेक्टर शैलेन्द्र सिंह एवं रविशंकर राय भी मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
एक ओर प्रशासन पट्टा प्रक्रिया को सरल बनाकर घर-घर पहुंचने की बात कर रहा है, दूसरी ओर 74 वर्षीय बुजुर्ग अपने अधिकार के लिए वर्षों से भटकने को मजबूर बताए जा रहे हैं।
अब बड़ा सवाल—
क्या धारण अधिकार नियम के तहत नया पट्टा पाने के लिए 74 वर्षीय बुजुर्ग को अभी और चक्कर लगाने पड़ेंगे, या प्रशासन स्वयं उनके घर पहुंचकर वर्षों पुरानी इस फरियाद का समाधान करेगा?










