भुगतान और एफडी राशि जारी करने के एवज में मांगी थी 50 हजार की रिश्वत, सौदा 40 हजार में तय; लोकायुक्त निरीक्षक बृजमोहन नरवरिया के नेतृत्व में हुई कार्रवाई
जबलपुर, 7 जुलाई। भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लोकायुक्त पुलिस जबलपुर ने नगर परिषद पनागर के उपयंत्री शुभम जैन को 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में नगर परिषद का दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अभिलाष रजक को भी आरोपी बनाया गया है। पूरी ट्रैप कार्रवाई लोकायुक्त टीम के बृजमोहन नरवरिया के नेतृत्व में उनकी टीम द्वारा सफलतापूर्वक अंजाम दी गई।
लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता राजेंद्र कुमार सतनामी (39) निवासी जबलपुर ठेकेदारी का कार्य करते हैं। वर्ष 2024-25 में उन्हें नगर परिषद पनागर की स्वास्थ्य शाखा में कीटनाशक सामग्री आपूर्ति का लगभग 9.75 लाख रुपये का ठेका मिला था। सामग्री की आपूर्ति के बाद उन्हें पहली किस्त के रूप में 90 हजार रुपये तथा दूसरी किस्त में 64,066 रुपये का भुगतान प्राप्त हो चुका था।
शेष भुगतान और एफडी राशि के लिए मांगी रिश्वत
आरोप है कि शेष भुगतान तथा कार्यालय में जमा 48 हजार रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) राशि जारी करने के एवज में उपयंत्री शुभम जैन और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अभिलाष रजक ने शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता ने इसकी शिकायत लोकायुक्त पुलिस जबलपुर से की।
सत्यापन के बाद बिछाया जाल
लोकायुक्त टीम ने शिकायत का सत्यापन किया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद बृजमोहन नरवरिया के नेतृत्व में ट्रैप की योजना बनाई गई। बातचीत के बाद रिश्वत की राशि 50 हजार से घटाकर 40 हजार रुपये तय हुई।
40 हजार लेते ही दबोचा
सोमवार को नगर परिषद पनागर कार्यालय में शिकायतकर्ता ने जैसे ही उपयंत्री शुभम जैन को 40 हजार रुपये की रिश्वत दी, पहले से तैनात लोकायुक्त टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अभिलाष रजक को भी आरोपी बनाया गया है।
लोकायुक्त की सख्त कार्रवाई से मचा हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद नगर परिषद पनागर सहित प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। लोकायुक्त पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की विवेचना शुरू कर दी है। लोकायुक्त निरीक्षक बृजमोहन नरवरिया के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी और प्रभावी कार्रवाई माना जा रहा है।










