EOW का पत्र, CM हेल्पलाइन, जनसुनवाई और 74 वर्षीय बुजुर्ग की गुहार… क्या व्यवस्था फाइलों से चलेगी या कानून से ?
अंकित सेन
स्टेट हेड, उजला दर्पण मध्यप्रदेश
जबलपुर। रांझी तहसील से जुड़े कई प्रकरण अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार फरवरी 2025 से लंबित शिकायत, दिसंबर 2025 की सीएम हेल्पलाइन, चार जनसुनवाई और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) के पत्र क्रमांक 467/26,00779/2026(I) पर समयबद्ध कार्रवाई न होने के आरोप चर्चा का विषय बने हुए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसके बयान तक दर्ज नहीं किए गए, जबकि 2 जुलाई 2026 को तत्कालीन राजस्व निरीक्षक दरगंजन यादव के बयान दर्ज हुए और अगले ही दिन तत्कालीन तहसीलदार का स्थानांतरण हो गया। सवाल उठ रहे हैं कि जांच की प्राथमिकता तय कैसे हुई और शिकायतकर्ता का पक्ष पहले क्यों नहीं लिया गया?
इसी बीच 74 वर्षीय बुजुर्ग, का पट्टा प्रकरण भी प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है। उनका कहना है कि 625 वर्गफुट भूमि के आवेदन के स्थान पर 301 वर्गफुट का आदेश मिला। त्रुटि सुधार के लिए आवेदन, जनसुनवाई और उच्च स्तर पर गुहार के बावजूद समाधान नहीं हुआ। यदि एक बुजुर्ग नागरिक वर्षों तक अपने ही अधिकार के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाता रहे, तो आम नागरिक व्यवस्था से क्या अपेक्षा रखे?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अब रांझी तहसील में वर्ष 2022 से 2025 के दौरान तत्कालीन राजस्व निरीक्षक दरगंजन यादव एवं राजस्व निरीक्षक सुधीर सोनी के कार्यकाल में किए गए सभी नामांतरण, नजूल नामांतरण और धारणा अधिकार (नजूल) पट्टा प्रकरणों की व्यापक जांच की मांग उठने की चर्चा है। कहा जा रहा है कि जिन प्रकरणों में राजस्व निरीक्षकों की अनुशंसा के आधार पर आदेश हुए, उनका नियमों के अनुरूप परीक्षण कराया जाना जनहित में आवश्यक हो सकता है।
कलेक्टर महोदय, यह केवल कुछ फाइलों का मामला नहीं, बल्कि प्रशासन पर जनता के भरोसे का प्रश्न है। यदि सभी कार्यवाही नियमों के अनुसार हुई है तो स्वतंत्र जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा, और यदि कहीं कोई प्रक्रिया संबंधी चूक हुई है तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। आखिर फाइलें कब तक सवालों के नीचे दबी रहेंगी और जवाबदेही कब सामने आएगी? जनता अब आश्वासन नहीं, पारदर्शी जांच और स्पष्ट उत्तर चाहती है।









