आंगन फाउंडेशन का मकर संक्रांति सेवा अभियान: अपना घर आश्रम में राशन का दान

Angan Foundation's Makar Sankranti Service Campaign: Donation of ration to Apna Ghar Ashram
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आंगन फाउंडेशन परिवार द्वारा मकर संक्रांति के दिन अपना घर आश्रम में कच्चा राशन सामान का दान

मकर संक्रांति का पर्व हमारे जीवन में हर वर्ष न केवल धार्मिक आस्था को पुनः जागृत करता है, बल्कि यह हमें समाज में व्याप्त असमानताओं को दूर करने और जरूरतमंदों की मदद करने की प्रेरणा भी देता है। इस वर्ष मकर संक्रांति के दिन आंगन फाउंडेशन परिवार ने अपना घर आश्रम, जामडोली में कच्चा राशन सामान दान कर न केवल एक पुण्य कार्य किया, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग का नया उदाहरण पेश किया।

आंगन फाउंडेशन परिवार ने इस साल भी अपनी पारंपरिक पहल को जारी रखते हुए लगभग 1,30,000 रुपए का राशन सामग्री भामाशाहों के सहयोग से प्रदान किया। यह राशन सामग्रियां उन माताओं और बुजुर्गों के लिए भेजी गईं, जो अपना घर छोड़कर आश्रम में रह रहे हैं और जिनकी मदद के लिए हर किसी का दिल तत्पर रहता है। इस मदद का उद्देश्य उन वृद्धों को जरूरी राशन सामग्री देना था, ताकि उनका जीवन बेहतर और आरामदायक हो सके।

आंगन फाउंडेशन परिवार का उद्देश्य:
आंगन फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य समाज के उन बुजुर्गों की मदद करना है जो किसी कारणवश अपने परिवार से दूर आश्रमों में रह रहे हैं। संस्था के उपाध्यक्ष केशव पीतलिया ने बताया, “जब हम पहली बार इस आश्रम में आए थे, तो यहां 118 माताएं रहती थीं, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 185 हो चुकी है। यह बढ़ती हुई संख्या हमारे समाज में बदलाव की जरूरत को दर्शाती है। हमारा प्रयास यही है कि हर व्यक्ति अपने माता-पिता की सेवा करे और उन्हें ऐसे आश्रमों में न भेजे।”

आंगन फाउंडेशन परिवार का यह विचार है कि वे ऐसे स्थानों पर राशन, दवाइयां, और अन्य सुविधाएं प्रदान करें, ताकि वहां रहने वाले बुजुर्गों को अपना जीवन आराम से और सम्मान के साथ जीने का मौका मिले। संस्था का यह भी मानना है कि उनके प्रयासों से समाज में यह जागरूकता आएगी कि बुजुर्गों को किसी भी कारणवश आश्रम में भेजना उनकी जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें अपने घरों में परिवार के साथ रहना चाहिए।

दान की प्रक्रिया और भामाशाहों का योगदान:
आंगन फाउंडेशन परिवार ने यह सुनिश्चित किया कि राशन का वितरण सही तरीके से किया जाए और सभी जरूरतमंदों को सही मात्रा में सामान मिले। भामाशाहों के योगदान से यह दान संभव हो पाया। इन भामाशाहों का आंगन फाउंडेशन परिवार के कार्यों में अहम योगदान है। राशन की सूची में चावल, दालें, आटा, तेल, मसाले, और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल थीं।

आंगन फाउंडेशन की पूरी टीम ने इस कार्य को समय पर और सही तरीके से संपन्न किया। संस्था के अध्यक्ष गोविंद नाटाणी ने कहा, “हमारे भामाशाहों और सभी सदस्यों का योगदान इस कार्य को सफल बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका सहयोग हमें अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है।”

आंगन फाउंडेशन परिवार का समाज में प्रभाव:
आंगन फाउंडेशन परिवार की इस पहल ने समाज में एक नई मिसाल कायम की है। यह सिर्फ एक दान कार्य नहीं है, बल्कि यह एक संदेश है कि समाज में जरूरतमंदों की मदद करना हम सभी का कर्तव्य है। संस्था का प्रयास न केवल राशन वितरण तक सीमित है, बल्कि वे समाज में हर व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने और असहायों की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

इस दौरान संस्था के अन्य सदस्य जैसे अंकित सोंखीया (उपाध्यक्ष), शिवकृष्ण गुप्ता (कोषाध्यक्ष), प्रीतम नाटाणी, प्रियांशु खंडेलवाल, अंकित गुप्ता, सौरभ गुप्ता, विकास खंडेलवाल, मोहित नाटाणी, पियूष नाटाणी, गोपाल शर्मा, श्याम खंडेलवाल, गिरीश गुप्ता, सुनील गुप्ता, विष्णु खंडेलवाल, लक्ष्मीकांत तिवाड़ी और अन्य सभी टीम सदस्य आश्रम में मौजूद रहे और राशन वितरण कार्य में मदद की।

समाज में सेवा का महत्व:
यह कार्य इस बात को दर्शाता है कि सेवा करने के केवल उद्देश्य से किया गया काम कितना प्रभावी हो सकता है। जब हम जरूरतमंदों की मदद करते हैं, तो हमें न केवल संतोष मिलता है, बल्कि समाज में एक सकारात्मक बदलाव भी आता है। यह दान कार्य हमें यह सिखाता है कि यदि हम सब मिलकर अपने छोटे-छोटे प्रयासों से एक-दूसरे की मदद करें, तो समाज में समृद्धि और खुशहाली आ सकती है।

आंगन फाउंडेशन की भविष्य की योजनाएँ:
आंगन फाउंडेशन परिवार का यह अभियान केवल एक शुरुआत है। वे भविष्य में भी इस तरह की मदद और दान कार्यों को जारी रखना चाहते हैं। उनका उद्देश्य हर साल अधिक से अधिक आश्रमों और जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाना है। उनके अनुसार, यह दान कार्य केवल मकर संक्रांति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वे हर दिन अपने कार्यों के माध्यम से समाज की सेवा करते रहेंगे।

आंगन फाउंडेशन का यह कदम केवल एक दान कार्य नहीं था, बल्कि यह समाज में एक जागरूकता और सेवा का संदेश देने वाला कार्य था। मकर संक्रांति का दिन इस पुण्य कार्य को अंजाम देने के लिए एक शुभ अवसर था, और यह सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना है। यह दान कार्य हमें यह सिखाता है कि हम सभी मिलकर किसी भी समस्या का समाधान कर सकते हैं और समाज में सच्ची मानवता का प्रसार कर सकते हैं।

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