हैरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा देने वाला आभानेरी फेस्टिवल

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आभानेरी ग्राम, दौसा (राजस्थान), राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहरों और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत करने वाला आभानेरी फेस्टिवल शुक्रवार को धूमधाम से शुरू हुआ। इस दो दिवसीय फेस्टिवल का आयोजन पर्यटन विभाग, दौसा जिला प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संयुक्त तत्वाधान में किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान के ग्रामीण पर्यटन और हैरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा देना है। आभानेरी ग्राम की ऐतिहासिकता और यहां की सांस्कृतिक विविधता ने देशी-विदेशी सैलानियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विदेशी सैलानियों के बीच लोकप्रिय हुआ आभानेरी ग्राम

शुक्रवार को शुरू हुए इस फेस्टिवल में देश और विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे। पहले दिन ही करीब 400 से 500 विदेशी सैलानी यहां की सांस्कृतिक धरोहर को करीब से देखने आए। परम्परागत राजस्थानी स्वागत के साथ विदेशी मेहमानों का आभानेरी ग्राम में स्वागत किया गया। माला पहनाकर और तिलक लगाकर अतिथियों का स्वागत करना, राजस्थान की अतिथि सत्कार की प्राचीन परंपरा को दर्शाता है, जिसे विदेशी सैलानियों ने अत्यधिक सराहा।

लोक नृत्य और कलात्मक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

फेस्टिवल के दौरान राजस्थानी लोक संस्कृति की अद्वितीय झलक देखने को मिली। वीर रस से भरपूर कच्छी घोड़ी नृत्य ने सैलानियों को अपने रंग में रंग लिया। सैलानियों ने कलाकारों के साथ थिरकते हुए स्थानीय संस्कृति में घुल-मिल जाने का अद्भुत अनुभव प्राप्त किया। इसके अलावा बहरूपिया कला, कठपुतली नाट्य कला और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया।

स्थानीय हस्तशिल्प और परंपरागत कलाओं का आकर्षण

पर्यटन विभाग के उपनिदेशक उपेंद्रसिंह शेखावत के अनुसार, इस फेस्टिवल में स्थानीय कारीगरों को भी अपनी कलाओं का प्रदर्शन करने का अवसर मिला। आभानेरी ग्राम में आयोजित इस कार्यक्रम में लखेरों, कुम्हारों और लोहारों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। सैलानियों ने कुम्हार के चलते चाक, लोहारों के उत्पाद और लखेरों की कला से बनी चूड़ियों को देखा। यह नजारा विशेष रूप से विदेशी मेहमानों को आकर्षित कर गया। कई विदेशी सैलानियों ने इन हस्तनिर्मित वस्तुओं की खरीदारी भी की, जिससे स्थानीय कारीगरों की कला को और भी पहचान मिली।

ग्राम-भ्रमण का आकर्षण: कैमल कार्ट सफारी

ग्राम आभानेरी का पूरा वातावरण राजस्थान की ग्रामीण पृष्ठभूमि से ओतप्रोत है, और इसका अनुभव सैलानियों के लिए कैमल कार्ट सफारी के जरिए और भी खास बन जाता है। पर्यटकों के लिए इस फेस्टिवल के दौरान कैमल कार्ट की व्यवस्था की गई थी, जो उन्हें आभानेरी ग्राम और उसके ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करवाती है। यह सफारी विदेशी सैलानियों के बीच खासा लोकप्रिय रही, क्योंकि इस माध्यम से वे ग्रामीण जीवन और उसके सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ पाते हैं।

हर्षद माता मंदिर और चांद बावड़ी: आभानेरी के प्रमुख आकर्षण

आभानेरी ग्राम का हर्षद माता मंदिर और विश्वविख्यात चांद बावड़ी इस फेस्टिवल के प्रमुख आकर्षण रहे। दसवीं शताब्दी में निर्मित ये धरोहरें पर्यटकों के लिए विशेष रुचि का केंद्र बनी हुई हैं। मंदिर और बावड़ी की उत्कृष्ट वास्तुकला और इनकी ऐतिहासिक महत्ता सैलानियों को खास तौर पर आकर्षित करती है। फेस्टिवल के दौरान दिनभर पर्यटक इन स्थलों का भ्रमण करते हैं और शाम को सांस्कृतिक संध्या का आनंद लेते हैं।

सांस्कृतिक संध्या ने बांधा समां

प्रत्येक दिन शाम 7 बजे से 9 बजे तक आयोजित की जाने वाली सांस्कृतिक संध्या पर्यटकों के लिए एक विशेष अनुभव साबित हो रही है। राजस्थान के विभिन्न लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नृत्य, संगीत और नाट्य प्रदर्शनों ने सैलानियों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया। फेस्टिवल का यह भाग विदेशी पर्यटकों के साथ-साथ देशी पर्यटकों के बीच भी अत्यधिक लोकप्रिय रहा।

हैरिटेज टूरिज्म को बढ़ावा देने की अनूठी पहल

आभानेरी फेस्टिवल न केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का संगम है, बल्कि यह राजस्थान की धरोहरों को संरक्षित करने और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का एक उत्कृष्ट प्रयास है। उपनिदेशक उपेंद्रसिंह शेखावत ने बताया कि यह फेस्टिवल हर साल राजस्थान के ग्रामीण और ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। इसके जरिए देशी-विदेशी पर्यटकों को राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से अवगत कराने का प्रयास किया जाता है।

दो दिवसीय आभानेरी फेस्टिवल शनिवार को संपन्न होगा, जिसमें सैलानियों के लिए कई और विशेष प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी।

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