रानीताल मुक्तिधाम में हादसे को न्योता देता गड्ढा, जिम्मेदारों की अनदेखी

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जबलपुर | शहर का रानीताल मुक्तिधाम हादसे को दावत दे रहा है। मुख्य द्वार के ठीक सामने बना बड़ा गड्ढा किसी बड़े हादसे की चेतावनी दे रहा है, लेकिन जिम्मेदार आंख मूंदे बैठे हैं। यह गड्ढा सड़क से होकर सीधा 10 फीट गहरे नाले से जा मिला है। अगर कोई राहगीर, जानवर या वाहन इसमें गिरा, तो सीधे नाले में जा पहुंचेगा।

 

मुक्तिधाम के गेट के सामने बना यह खतरा बीते चार दिनों से जस का तस है। क्षेत्र जोन क्रमांक 2 में आता है, लेकिन नगर निगम का अमला और सुपरवाइजर हर दिन मौके से गुजरते हैं और चुपचाप बढ़ जाते हैं।

 

“मैं मुक्तिधाम हूं… मुझसे ही अब खतरा है”

 

अगर रानीताल मुक्तिधाम खुद बोल सकता, तो शायद चीख कर कहता —

“मौत के बाद लोग मेरे पास आते हैं, लेकिन अब लगता है मैं खुद मरने की कगार पर हूं। पहले से ही गंदगी झेल रहा हूं, अब लोगों की जान भी मुझसे जुड़ने लगी है।”

 

गेट के पास कचरे का अंबार है। सफाईकर्मी महीनों से झांकने नहीं आए। बगल से बहता नाला बजबजा रहा है। हाल यह है कि श्रद्धालु हों या अंतिम यात्रा में आए लोग — सभी को दुर्गंध और बदहाली के बीच अपनों को विदा करना पड़ता है।

 

कमिश्नर से लेकर महापौर तक सब खामोश

 

मुक्तिधाम का सवाल है — “क्या मेरी सफाई के लिए कोई बजट नहीं है? क्या मुझे मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिलेंगी?”

जोन 2 के सीएसआई विष्णुकांत दुबे को लेकर भी स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोग पूछ रहे हैं कि जब समस्या क्षेत्र में है, तो जिम्मेदार चुप क्यों हैं?

 

महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू से भी अपील की जा रही है कि शहर को ‘संस्कारधानी’ कहने से पहले मुक्तिधामों की हालत भी देखें।

 

अगर हालात नहीं सुधरे, तो शहर के सभी लोग एकजुट होकर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। यह सिर्फ गड्ढा नहीं, सिस्टम की लापरवाही की गहराई को दिखाता है।

 

सवाल साफ है — क्या जिम्मेदार अब भी जागेंगे, या किसी हादसे का इंतज़ार करेंगे?

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