जयपुर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में शुरू की गई राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना देशभर के पशुपालकों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों की आय बढ़ाना, दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन देना और देशी नस्लों का संरक्षण एवं सुधार करना है।
दुग्ध उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि
पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने राज्यसभा में सांसद मदन राठौड़ के तारांकित सवाल के जवाब में बताया कि बीते दस वर्षों में दूध उत्पादन में 63.56% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
2014-15: दूध उत्पादन 146.3 मिलियन मीट्रिक टन।
2023-24: दूध उत्पादन 239.3 मिलियन मीट्रिक टन।
इस शानदार उपलब्धि का श्रेय राष्ट्रीय गोकुल मिशन और अन्य योजनाओं को दिया जा रहा है, जो पशुपालन क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही हैं।
देशभर में लाखों किसान लाभान्वित
राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत देशभर में 4 करोड़ 58 लाख 14 हजार 284 किसान लाभान्वित हुए हैं। इनमें राजस्थान के 32 लाख 47 हजार 550 किसान भी शामिल हैं। योजना के तहत राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के जरिए इन किसानों को सहायता प्रदान की गई।
राजस्थान में 55.99 लाख पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान किया गया।
देशभर में 38,000 से अधिक मैत्रियों (कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन) को प्रशिक्षित किया गया, जिनमें राजस्थान के 771 मैत्री शामिल हैं।
देशी नस्लों के सुधार की दिशा में उल्लेखनीय कार्य
योजना के अंतर्गत देशी नस्लों के सुधार को प्राथमिकता दी गई है।
राजस्थान में साहीवाल, थारपारकर और राठी नस्ल के पशुओं के लिए संतति परीक्षण और नस्ल चयन कार्यक्रम शुरू किया गया।
देशभर में आईवीएफ तकनीक के इस्तेमाल से 32 बछड़े और बछड़ियों को जन्म दिया गया।
राजस्थान में 7 नस्ल वृद्धि फार्म स्थापित किए जाएंगे, जिसकी स्वीकृति केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जा चुकी है।
स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर
योजना के तहत 70 सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों (ए-हेल्प) को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। ये प्रशिक्षित व्यक्ति पशुधन उत्पादन के विस्तार में अहम भूमिका निभाएंगे।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का बयान
राज्यसभा सांसद और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने योजना की सराहना करते हुए कहा,
> “राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना ने न केवल पशुपालकों की आय में वृद्धि की है, बल्कि दुग्ध उत्पादन और देशी नस्ल सुधार के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। यह योजना हमारे किसानों और पशुपालकों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है।”
राजस्थान पर विशेष ध्यान
राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत राजस्थान में विशेष रूप से साहीवाल, थारपारकर और राठी जैसी देशी नस्लों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
राजस्थान में 771 मैत्रियों को कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन के रूप में तैनात किया गया।
7 नस्ल वृद्धि फार्म और केंद्र से मंजूर अतिरिक्त परियोजनाएं राज्य में पशुपालन को और सशक्त बनाएंगी।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन की व्यापकता
यह योजना न केवल दुग्ध उत्पादन और नस्ल सुधार तक सीमित है, बल्कि पशुपालकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण साधन बन चुकी है।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना ने पशुपालकों के लिए आय के नए स्रोत खोले हैं और देश में दुग्ध उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि की है। राजस्थान समेत पूरे देश में इस योजना के सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहे हैं।
पशुपालन में यह क्रांतिकारी पहल न केवल ग्रामीण भारत के विकास को गति दे रही है, बल्कि देश के पशुधन संरक्षण और वृद्धि के लिए एक ठोस आधार तैयार कर रही है।










