भगवान कृष्ण औऱ राधा का प्रेम पूरे जगत में सर्वोपरि प्रेम की अलग पराकाष्ठा स्थापित करता है, औऱ बताता है कि सच्चा प्रेम ह्रदय से जुड़ना है। कृष्ण के उत्सव में मीरा की अपार भक्ति है। लीलाधारी श्री कृष्ण का यह पर्व हमें याद दिलाता है एक सच्चे मित्र की जहाँ कृष्ण ने एक राजा होकर गरीब सुदामा के पाँव अपने नयनों के आसुओं से धुले औऱ सर्वस्व उन पर वार दिया। यह पर्व याद दिलाता है भगवान कृष्ण के गीता के उपदेश का , किस तरह अर्जुन के रथ के सारथी बनकर जीवन का सार गीता सुनाई जो हमें सतमार्ग पर चलने कि प्रेरणा देती है।
इस जन्माष्टमी को मैं अपने साथियों से यही कहना चाहती हूँ कि हर व्यक्ति में एक कृष्ण छिपा होता है, बस हमें तलाशने की देर है, हमारे आस पास ही कृष्ण होते हैँ, हर वो व्यक्ति जो सही मार्ग दिखाये, निश्छल प्रेम करे औऱ हमारा मार्ग प्रकाशित करे उसे ही कृष्ण मान कर कुछ जरूर सीखना। इसी के साथ जन्माष्टमी की ढेर सारी शुभकामनायें।
“मोहन के हैँ रूप कितने और हैँ कितने नाम
राधा के नटवर भये और मीरा के श्याम”
प्रिया शुक्ला(प्रवक्ता सर्व ब्राह्मण महासभा ऑस्ट्रेलिया)
जन्माष्टमी सिर्फ भगवान कृष्ण के जन्मदिन का महापर्व ही नहीं है बल्कि इसके साथ साथ ही यह शुभ पर्व हमें सन्देश देता है अधर्म पर धर्म की विजय का, निश्छल प्रेम का औऱ भक्ति का।
by उजला दर्पण
Updated On: August 26, 2024 4:34 pm

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