आखिर पूरे 36 गुण मिलने पर भी क्यों टूट जाती है शादियां ? जानें असली वजह
हिंदू धर्म में शादियां करने के लिए कुंडली मिलान करना और रीति रिवाज करना बहुत जरूरी होता है। अक्सर यह भी देखने को मिलता है कि लड़के और लड़कियां अपनी पसंद से प्रेम विवाह कर लेते हैं और उनके रिश्ते उम्र भर नहीं टूटते हैं। लड़का-लड़की की शादी के लिए कुंडलीयों का मिलान किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, लड़के और लड़की की शादी के पश्चात् सुखमय जीवन के लिए कुंडली का मिलान किया जाना आवश्यक होता है। जिन लड़के – लड़कीयों के 36-36 या 36-30 तक गुण मिल जाते हैं, उनका विवाह अटूट माना गया है। लेकिन अक्सर यह भी देखने को मिलता है कि 36-36 गुण मिलने के बाद भी विवाह टूट जाता है और दोनों को कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं।आखिर ऐसा क्यों होता है ? ये जानना बहुत आवश्यक है।


इस सवाल को लेकर हमने ज्योतिष पर शोध कर रहे ज्योतिषाचार्य पंडित धर्मराज भार्गव से सवाल किया कि शादियां करने के लिए गुण मिलान करना बहुत जरूरी होता है। किन्तु अक्सर यह भी देखने को मिलता है कि 36 गुण मिलने के बाद भी शादियां टूट जाती हैं।
ज्योतिष शोधकर्ता पंडित धर्मराज भार्गव बताते हैं कि गुण मिलान कुंडली मिलान का ही एक भाग है जो चंद्रमा व नक्षत्र के आधार पर ही किया जाता है। कुंडली मिलान में सभी नौ ग्रह और 12 भावों का मूलयांक किया जाता है जिसके आधार पर शादी विवाह का शुभ मुहूर्त निकाला जाता है।
36 में से 5 गुण मिलने के बाद भी शादियां टिक जाती हैं
वह बताते हैं कि सिर्फ गुण मिलान के आधार पर शादी विवाह करना यह उचित नहीं होता। गुण मिलान संपूर्ण कुंडली मिलन का केवल 10 प्रतिशत भाग ही होता है , इसलिए 36-36 गुण मिलने के बाद भी शादियां टूट जाती हैं। पंडित धर्मराज भार्गव बताते हैं कि संपूर्ण कुंडली मिलान के बाद ही शादी करना उचित होता है। इसलिए 36 में से 5 गुण मिलने के बाद भी शादियां टिक जाती हैं।
दरअसल शादी विवाह से पहले लड़का लड़की दोनों की कुंडली में गुण, कुंडली भाव, ग्रहों की चाल और स्थिति, मांगलिक दोष, नाड़ी दोष आदि सभी देखे जाते हैं। इस दौरान कुंडली में दूसरा भाव, सप्तम भाव, दसवां भाव और एकादश भाव विवाह से संबंधित होते हैं इसलिए इन्हें देखना बहुत जरूरी होता है।
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भाव और ग्रहों का महत्व
शोधकर्ता पंडित धर्मराज भार्गव बताते हैं कि दोनों की कुंडली में भाव और ग्रह भी मिलाने होते हैं, जिससे भविष्य में उनकी शादी में कोई परेशानी या बाधा न आए। शोधकर्ता पंडित धर्मराज भार्गव बताते हैं कि कुंडली में ग्रहों का संतुलित होना सबसे अधिक जरूरी होता है, केवल गुण मिलान के कारण ही शादी होना उचित नहीं। बल्कि शादी करने के लिए गुण मिलान, कुंडली मिलान, ग्रहों का संतुलित होना, नाड़ी दोष सहित सभी चीज देखकर ही शादी की जाए तो 36 में से 5 गुण मिलने के बाद भी शादी नहीं टूटती।

शादी विवाह का मुहूर्त शास्त्रों के अच्छे ज्ञाता से ही निकलवाएं
अक्सर आज के समय में यही भ्रांति है कि 36-36 गुण मिलने के बाद शादी नहीं टूटती है, लेकिन यह भी देखने को मिलता है कि 36-36 गुण मिलने के बाद भी शादियां टूट जाती हैं। शोधकर्ता ज्योतिष पंडित धर्मराज भार्गव बताते हैं कि किसी विद्वान या फिर शास्त्रों के अच्छे ज्ञाता से ही शादी विवाह का मुहूर्त निकलवाएं और उसमें गुण मिलान के साथ कुंडली मिलान, ग्रहों का संतुलित होना, नाड़ी दोष आदि सभी की जानकारी जरूर कर लें।
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**नोट:** कुंडली दिखाने को लेकर और अधिक जानकारी के लिए आप ज्योतिषाचार्य पंडित धर्मराज भार्गव से PANDITDHARAMRAJBHARGAV@GMAIL.COM बातचीत कर जानकारी ले सकते हैं।










