स्टार्टअप्स देश को 10 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था तक पहुंचाने में बल देंगे” – टी वी मोहनदास पाई

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jaipur भारत रणनीतिक रूप से ‘प्रॉब्लम सॉल्वर’ (problem solvers) को सशक्त बनाने के लिए खुद को तैयार कर रहा है। वैश्विक स्तर पर वेल्यु क्रिएशन के लिए शीर्ष तीन में पहुंचना इसका प्रमाण है। भारतीय वैश्विक मंच पर यूनिकॉर्न के निर्माण का नेतृत्व कर रहे हैं। स्टार्टअप देश को 10 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था तक पहुंचाने के लिए बल गुणक साबित होंगे। यह बात मणिपाल ग्लोबल एजुकेशन के चेयरपर्सन और प्रसिद्ध भारतीय बिजनेसमैन, टीवी मोहनदास पाई ने आज जयपुर में ‘भारत@2047’ विषय पर अपने विचार साझा करते हुए कही। यह कार्यक्रम डाटा इंफोसिस, जिसे अब डाटा इंजिनियस ग्लोबल लिमिटेड के नाम से जाना जाता है, की 25वीं सिल्वर जुबली के अवसर पर आयोजित किया गया था।

कार्यक्रम की शुरूआत में अपने स्वागत भाषण में, डाटा ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक, श्री अजय डाटा ने नवाचार, ढृढ़ता और सफलता के प्रतीक के रूप में कंपनी की 25 वर्ष की लंबी यात्रा पर प्रकाश डाला।

श्री पाई ने आगे कहा कि बढ़ती उम्र (एजिंग) मानवता की सबसे बड़ी चुनौती है। अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की एक बड़ी ताकत इसकी युवा आबादी है और 2100 तक

भारत में युवा आबादी बनी रहेगी। आर्थिक विकास को गति देने वाले अन्य लाभों के अतिरिक्त, भारत में डिजिटलीकरण का परिवर्तनकारी प्रभाव भी सामने उबरकर आया है। भारत, जो सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट में सबसे बड़ी ताकत है और एक उभरते ‘डीप टैक हब’ के रूप में प्रसिद्ध है, बड़े पैमाने पर डिजिटल प्लेटफॉर्म का लाभ उठा रहा है। श्री पाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि ‘प्रौद्योगिकी द्वारा बुनियादी आवश्यकताओं तक व्यापक पहुंच’ पर प्रकाश डाला।

भविष्य के बारे में बात करते हुए उन्होंने टिप्पणी की कि अगले कुछ वर्षों में, भारत ‘डेटा पूअर’ से ‘डेटा रिच’ बन जाएगा। भारत ने विकास के लिए प्रौद्योगिकी सक्षम बल गुणक के रूप में डिजिटल पब्लिक गुड्स (डीपीजी) के उपयोग की शुरुआत की है। डीपीजी पब्लिक गुड्स (और सर्विसेज) वितरित करने के नया और बेहतर तरीका है, जिसमें आधार पहचान प्रणाली, स्वास्थ्य सेवा, सरकारी योजनाएं और बैंकिंग और भुगतान जैसे अन्य डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

राजस्थान के लिए, श्री पाई ने सुझाव दिया कि राज्य को रोजगार बढ़ाने के साथ-साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए श्रम-केंद्रित उद्योगों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राज्य में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, जिनका अभी भी पूरी तरह उपयोग करने की जरूरत है।

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