बरगी जलाशय में वैज्ञानिक मत्स्य पालन को बढ़ावा, फ्लोटिंग फिश केज का कलेक्टर ने किया निरीक्षण
राजा राज तिलक धुरवे के प्रयासों से मत्स्य पालक समूहों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की पहल, उत्पादन एवं रोजगार बढ़ाने पर जोर
जबलपुर। बरगी जलाशय में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने तथा मत्स्य पालकों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में मत्स्य विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक स्वरूप सामने आया है। इसी क्रम में कलेक्टर श्री अरुण कुमार विश्वकर्मा ने बरगी जलाशय स्थित फ्लोटिंग फिश केज (तैरते हुए मछली पालन पिंजरों) का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से किए जा रहे पंगेसियस मछली पालन की प्रक्रिया का जायजा लिया और मत्स्य उत्पादन की संभावनाओं की जानकारी प्राप्त की।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने मत्स्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि जलाशय में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए मछली उत्पादन को बढ़ाया जाए। साथ ही मत्स्य पालक समूहों को शासन की एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, जिससे स्थानीय मत्स्य पालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो और मत्स्य पालन को आजीविका के स्थायी साधन के रूप में विकसित किया जा सके।
### मत्स्य विभाग की पहल से बढ़ रही आधुनिक मत्स्य पालन की संभावनाएं
इस पूरी पहल में सहायक संचालक मत्स्य विभाग राजा राज तिलक धुरवे के प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। उनके प्रयासों से मत्स्य पालन की पारंपरिक गतिविधियों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन और व्यावसायिक दृष्टिकोण से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य केवल मछली उत्पादन तक सीमित न रहकर मत्स्य पालक समूहों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, शासकीय योजनाओं की जानकारी और आर्थिक अवसरों से जोड़ना है।
बरगी जलाशय में फ्लोटिंग फिश केज इसी आधुनिक व्यवस्था का उदाहरण हैं। इसमें जलाशय के भीतर विशेष जालीनुमा पिंजरे स्थापित किए जाते हैं, जिनमें नियंत्रित एवं वैज्ञानिक तरीके से मछलियों का पालन किया जाता है। इससे उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होता है। पंगेसियस मछली पालन में मछलियों की वृद्धि, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य आहार, जल की स्थिति और उत्पादन प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
### एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 से खुलेंगे नए अवसर
मध्यप्रदेश शासन की एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 का उद्देश्य मत्स्य पालन को आजीविका की पारंपरिक गतिविधि से आगे बढ़ाकर एक संगठित उद्योग के रूप में विकसित करना है। इसके अंतर्गत जलाशय आधारित केज कल्चर, मत्स्य बीज उत्पादन, आहार व्यवस्था, प्रसंस्करण, शीतगृह, विपणन और निर्यात जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
इससे मत्स्य पालक समूहों को उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ बाजार तक बेहतर पहुंच बनाने के अवसर मिल सकते हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और मछुआरा परिवारों की आय में वृद्धि की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
उल्लेखनीय है कि 23 अक्टूबर 2026 को भोपाल में आयोजित फिशरीज इन्वेस्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश के लिए मत्स्य निवेश एवं निर्यात संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए गए। प्रदेश के 49 जलाशयों और 5 अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास की योजनाओं को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। Press Information Bureau +1
### बरगी जलाशय बन सकता है मत्स्य उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र
बरगी जलाशय में वैज्ञानिक पद्धति से हो रहा पंगेसियस मछली पालन जबलपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के लिए मत्स्य उद्योग की नई संभावनाएं प्रस्तुत करता है। आवश्यकता इस बात की है कि मत्स्य विभाग की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र समूहों तक पहुंचे और उन्हें तकनीकी सहायता के साथ उत्पादन के लिए बाजार भी उपलब्ध कराया जाए।
कलेक्टर श्री अरुण कुमार विश्वकर्मा का निरीक्षण इसी दिशा में विभागीय गतिविधियों की समीक्षा और उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों को गति देने से जुड़ा है।
राजा राज तिलक धुरवे के प्रयासों और मत्स्य विभाग के समन्वित कार्यों से बरगी जलाशय में आधुनिक मत्स्य पालन को नई पहचान मिलने की संभावनाएं हैं।
स्रोत संदर्भ: मध्यप्रदेश मत्स्य विभाग एवं भारत सरकार, मत्स्य पालन विभाग की प्रकाशित जानकारी।
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