रांझी तहसील में कैंटीन के टेंडर से आगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर उठे सवाल, कलेक्टर से कार्रवाई की मांग
‘उजला दर्पण’ का दावा—छह महीने से लगातार प्रकाशित की जा रही खबरें, फिर भी कार्रवाई पर सवाल; तत्कालीन आरआई सुधीर सोनी के विरुद्ध EOW के पत्र पर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग
जबलपुर। रांझी तहसील कार्यालय में बिना टेंडर कैंटीन संचालन का मामला अब केवल टेंडर प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है। तहसील में कथित अनियमितताओं, बिचौलियों की सक्रियता और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इन मामलों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जा रही है।
समाचार पत्र ‘उजला दर्पण’ की ओर से किए गए दावे के अनुसार, रांझी तहसील में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े मामलों को लेकर पिछले छह महीने से लगातार समाचार प्रकाशित किए जा रहे हैं। इसके बावजूद संबंधित मामलों में अब तक क्या कार्रवाई हुई है, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग की जा रही है। सवाल यह है कि यदि शिकायतों और समाचारों में उठाए गए मुद्दों में तथ्य हैं, तो उनकी जांच किस स्तर पर पहुंची है और जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया क्या है?
कैंटीन के टेंडर से लेकर कथित लेन-देन तक जांच की मांग
रांझी तहसील कार्यालय परिसर में संचालित कैंटीन को लेकर आरोप है कि यह लंबे समय से बिना विधिवत टेंडर प्रक्रिया के संचालित हो रही है। इसके साथ ही कुछ बिचौलियों द्वारा आवेदकों के राजस्व संबंधी कार्य शीघ्र कराने के नाम पर कथित कमीशन लेने की शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है।
यह आरोप भी सामने आया है कि कैंटीन संचालक के बैंक खाते का इस्तेमाल कुछ संदिग्ध लेन-देन के लिए किया जा रहा है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए बैंकिंग रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच की आवश्यकता है। प्रशासन द्वारा जांच कराए जाने पर ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
तत्कालीन आरआई सुधीर सोनी के मामले पर भी उठे सवाल
रांझी तहसील से जुड़े मामलों में तत्कालीन राजस्व निरीक्षक (आरआई) सुधीर सोनी का नाम भी उठाया गया है। ‘उजला दर्पण’ की ओर से दावा किया गया है कि उनके विरुद्ध आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) का पत्र कलेक्टर कार्यालय तक पहुंच चुका है। इस पत्र की विषयवस्तु, वर्तमान स्थिति और उस पर हुई कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने आना आवश्यक है।
इस संबंध में यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि संबंधित पत्र प्राप्त हुआ है, तो उस पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है? क्या मामले की जांच की गई है, क्या कोई जवाब मांगा गया है और क्या आगे की कार्रवाई के लिए प्रकरण संबंधित विभाग को भेजा गया है? इन बिंदुओं पर प्रशासन की ओर से स्पष्ट जानकारी मिलने से मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
फिलहाल, पत्र के कलेक्टर कार्यालय में लंबित रहने या जानबूझकर दबाए जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस संबंध में संबंधित अभिलेखों और आधिकारिक पक्ष की जानकारी महत्वपूर्ण है।
कलेक्टर महोदय से सीधा सवाल—शिकायतों की जांच कब होगी?
रांझी तहसील से जुड़े इन आरोपों के बीच जिला प्रशासन के सामने पारदर्शिता सुनिश्चित करने और शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की चुनौती है। यदि लंबे समय से शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, तो उनकी जांच की स्थिति सार्वजनिक करना और शिकायतकर्ताओं को नियमानुसार कार्रवाई की जानकारी देना आवश्यक है।
कलेक्टर महोदय से मांग की जा रही है कि कैंटीन संचालन की अनुमति एवं टेंडर संबंधी अभिलेखों की जांच कराई जाए, कथित बिचौलियों की भूमिका की पड़ताल की जाए तथा संदिग्ध लेन-देन के आरोपों की सक्षम एजेंसी से जांच कराने पर विचार किया जाए। साथ ही, तत्कालीन आरआई सुधीर सोनी से संबंधित बताए जा रहे EOW पत्र की स्थिति स्पष्ट कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक की जाए।
अब प्रशासनिक जवाब और कार्रवाई का इंतजार
रांझी तहसील में कथित अनियमितताओं को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब केवल आश्वासन से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और तथ्यात्मक जानकारी से मिल सकता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, जिन व्यक्तियों के नाम आरोपों में सामने आए हैं, उनका पक्ष जानना और उन्हें अपना जवाब रखने का अवसर देना भी जरूरी है।
अब बड़ा सवाल यही है कि रांझी तहसील से जुड़ी शिकायतों की जांच कब पूरी होगी और प्रशासन इन मामलों में क्या कदम उठाएगा? कलेक्टर कार्यालय की ओर से आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि अब तक क्या कार्रवाई हुई है और आगे की प्रक्रिया क्या होगी।










