“डीन पर कार्रवाई नहीं कर सकते तो स्वास्थ्य मंत्री किस बात के?” — नारायण त्रिपाठी
कल्पना मिश्रा की मौत पर बोले—“जिम्मेदारी नहीं निभा सकते तो इस्तीफा दे दें”
रीवा। विंध्य की बेटी कल्पना मिश्रा की जच्चा-बच्चा सहित हुई मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। घटना से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद पूरे विंध्य में आक्रोश है। मृतका के पिता सहित कई बुद्धिजीवी न्याय की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हैं। इसी बीच पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के बयान को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है।
त्रिपाठी ने कहा कि पूर्व भाजपा विधायक पंचूलाल प्रजापति सरल और सहज व्यक्ति हैं। पार्टी के साथ खड़ा होना उनकी राजनीतिक मजबूरी हो सकती है, लेकिन सवाल उन लोगों से है जो सत्ता में बैठकर जनता को जवाब देने की जिम्मेदारी रखते हैं।
उन्होंने कहा कि विंध्य के कद्दावर नेता और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला का भरे मंच से यह कहना कि वे डीन पर कार्रवाई नहीं कर सकते, बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गैरजिम्मेदाराना है।
“फिर कार्रवाई किसके बूते पर होगी?”
नारायण त्रिपाठी ने सवाल किया कि जब प्रदेश का उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ही कह रहा है कि डीन पर कार्रवाई उसके बूते की बात नहीं है, तो फिर पीड़ित परिवार आखिर किसके पास जाए? कौन कार्रवाई करेगा और किससे न्याय की गुहार लगाई जाए?
उन्होंने कहा कि मृतका का पिता अपनी बेटी खो चुका है। परिवार की पीड़ा को समझने और दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय यदि जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति अपनी असमर्थता जाहिर करे, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
त्रिपाठी ने कहा कि आज मृतका के पिता और भाई ही नहीं, बल्कि पूरा विंध्य सरकार से पूछ रहा है कि अपनी पीड़ा किससे कहें, किस अधिकारी के सामने गुहार लगाएं और किससे निष्पक्ष जांच की उम्मीद करें?
“कुर्सी के साथ जवाबदेही भी आती है”
पूर्व विधायक ने कहा कि मंत्री पद केवल मंच पर बैठने और बयान देने के लिए नहीं होता। कुर्सी के साथ जवाबदेही भी आती है। यदि अपने ही विभाग के किसी जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई करने का अधिकार या सामर्थ्य नहीं है, तो फिर उस पद की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि परिजन जिन बिंदुओं पर जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, उसकी निष्पक्ष जांच कौन कराएगा? किस आईएएस, आईपीएस या जनप्रतिनिधि के पास परिवार जाए? सरकार को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
“नैतिक जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा दें”
नारायण त्रिपाठी ने कहा कि कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका और जवाबदेही की जांच होनी चाहिए। उन्होंने उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला से नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए तत्काल इस्तीफा देने की मांग की।
उन्होंने कहा कि मामला अब केवल एक परिवार के दुख का नहीं रहा। यह पूरे विंध्य की संवेदना और व्यवस्था पर भरोसे का सवाल बन चुका है। एक पिता न्याय के लिए अनशन पर बैठा है और सरकार के पास यदि उसके सवालों का जवाब नहीं है, तो फिर जनता किससे उम्मीद रखे?
अब निगाह इस बात पर है कि सरकार इस मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठाती है।










