मध्य प्रदेश पुलिस के पूर्व एआईजी अनिल मिश्रा को जयपुर की विशेष अदालत ने दुष्कर्म के एक मामले में दोषी ठहराते हुए कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उन पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी होने के बावजूद आरोपी ने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग किया, इसलिए किसी प्रकार की नरमी उचित नहीं है।
अभियोजन के अनुसार, वर्ष 2012 में पीड़िता के पति के एक मामले में मदद का भरोसा दिलाकर अनिल मिश्रा ने महिला से संपर्क किया। आरोप है कि इसके बाद विभिन्न स्थानों पर ले जाकर उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए गए। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी और उसकी बेटी से अश्लील तस्वीरें खिंचवाकर दबाव बनाने का प्रयास किया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने होटल रिकॉर्ड, दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के बयान अदालत में प्रस्तुत किए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना और कहा कि कानून के रक्षक द्वारा कानून का उल्लंघन समाज के विश्वास पर गंभीर आघात है।
अदालत ने आरोपी को कठोर आजीवन कारावास और दो लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इस फैसले को न्यायिक व्यवस्था में जवाबदेही और कानून के समक्ष समानता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।









