हाईकोर्ट के स्टे के बावजूद सरकारी डॉक्टर ने की दूसरी शादी, पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप

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जयपुर। राजधानी जयपुर में आयुर्वेदिक विभाग के एक वरिष्ठ सरकारी चिकित्सक पर माननीय उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश (स्टे) के बावजूद दूसरी शादी करने का आरोप लगा है। पीड़ित महिला चिकित्सक ने पति पर न्यायालय के आदेश की अवहेलना, गुजारा भत्ता नहीं देने, विभागीय स्तर पर प्रताड़ित करने और पुलिस द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर पीड़िता अब न्यायालय और मीडिया के माध्यम से न्याय की मांग कर रही है।

पीड़िता की ओर से पैरवी कर रहे हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता तपेश्वर पाल सिंह परमार ने बताया कि महिला की शादी 22 फरवरी 2016 को आयुर्वेदिक विभाग में कार्यरत वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पंकज दुलारा से हुई थी। विवाह के कुछ समय बाद ही कथित रूप से मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना शुरू हो गई, जिसके बाद महिला ने पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना (धारा 498A) और घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया। दंपति की एक छोटी बेटी भी है।

अधिवक्ता के अनुसार, डॉ. पंकज दुलारा ने 19 मार्च 2026 को निचली अदालत से एकतरफा तलाक की डिक्री प्राप्त कर ली थी। इसके खिलाफ महिला ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिस पर 8 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश पर स्थगन (स्टे) दे दिया। ऐसे में मामला विचाराधीन होने और स्टे लागू रहने के बावजूद 28 जून 2026 को आरोपी डॉक्टर द्वारा दूसरी शादी करने तथा जयपुर स्थित खोले के हनुमानजी मंदिर परिसर में प्रीतिभोज आयोजित करने का आरोप लगाया गया है।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि दोनों एक ही विभाग में कार्यरत हैं और पति ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए उसके खिलाफ छह बार विभागीय जांच करवाई। हालांकि, सभी जांचों में महिला चिकित्सक को क्लीन चिट मिली। इसके बावजूद कथित रूप से उसे लगातार मानसिक रूप से परेशान किया जाता रहा।

मामले में भरण-पोषण को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अधिवक्ता के अनुसार, न्यायालय ने पत्नी और बेटी के लिए 27,500 रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता निर्धारित किया था। इस आदेश के खिलाफ दायर अपील भी खारिज हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद आरोपी चिकित्सक ने नियमित भुगतान नहीं किया। वर्तमान में करीब 11 से 12 लाख रुपये का बकाया होने का दावा किया गया है, जबकि अब तक केवल 1 से 2 लाख रुपये जमा कराने की बात कही गई है।

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पीड़िता का कहना है कि उसने इस पूरे मामले की शिकायत गलता गेट थाने में भी की, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उसने प्रशासन और न्यायालय से मामले की निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

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