टोंक एसीबी की ट्रैप कार्रवाई, भीलवाड़ा के जहाजपुर तहसील में पदस्थ पटवारी भंवर सिंह गिरफ्तार; कोर्ट के आदेश की पालना के नाम पर वसूली का आरोप
टोंक/भीलवाड़ा। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए भीलवाड़ा जिले की जहाजपुर तहसील के पटवार हल्का ऊंचा में कार्यरत पटवारी भंवर सिंह को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने न्यायालय के आदेश के अनुसार जमीन की डिक्री दर्ज करने के बदले परिवादी से रिश्वत की मांग की थी। शिकायत का सत्यापन होने के बाद एसीबी टोंक इकाई ने योजनाबद्ध ट्रैप कार्रवाई कर आरोपी को उसकी कार में रिश्वत लेते पकड़ लिया।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक पुलिस गोविन्द गुप्ता ने बताया कि एसीबी की हेल्पलाइन 1064 पर शिकायत मिली थी कि परिवादी के पिता के पक्ष में न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय की पालना करते हुए जमीन की डिक्री दर्ज करने के लिए पटवारी भंवर सिंह 20 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि रिश्वत नहीं देने पर उसे लगातार परेशान किया जा रहा था।
सत्यापन के बाद बिछाया जाल
एसीबी ने शिकायत का सत्यापन कराया, जिसमें 25 जून 2026 को आरोपी द्वारा 20 हजार रुपये रिश्वत मांगने और लेने की सहमति की पुष्टि हुई। इसके बाद अजमेर रेंज के उप महानिरीक्षक नारायण टोगस के निर्देशन में टोंक एसीबी इकाई ने ट्रैप की योजना बनाई।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश मीणा के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी पटवारी को उस समय पकड़ लिया, जब उसने परिवादी को अपनी कार में बैठाकर रिश्वत की राशि कार के डैशबोर्ड (डेस्क बॉक्स) में रखवाई। एसीबी ने मौके से 20 हजार रुपये बरामद कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस स्मिता श्रीवास्तव तथा महानिरीक्षक एस. परिमला के सुपरवीजन में आरोपी से पूछताछ जारी है। ब्यूरो ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर अग्रिम अनुसंधान शुरू कर दिया है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि आरोपी अकेले रिश्वत मांग रहा था या इस पूरे मामले में किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भी भूमिका है।
न्यायालय के आदेश के पालन में भी रिश्वत, व्यवस्था पर गंभीर सवाल
यह मामला केवल रिश्वतखोरी का नहीं, बल्कि न्यायालय के आदेश के क्रियान्वयन में भी भ्रष्टाचार की घुसपैठ का संकेत देता है। अदालत का फैसला आने के बाद भी यदि आम नागरिक को अपने वैधानिक अधिकार के लिए रिश्वत देनी पड़े, तो यह राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
हाल के महीनों में एसीबी लगातार पटवारी, पुलिसकर्मी और अन्य सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ ट्रैप कार्रवाई कर रही है। इससे यह स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार के मामलों पर एजेंसी सक्रिय है, लेकिन दूसरी ओर यह भी संकेत मिलता है कि निचले स्तर पर रिश्वतखोरी अभी भी प्रशासन की बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रैप कार्रवाई के साथ-साथ विभागीय जवाबदेही, डिजिटल प्रक्रियाओं का विस्तार और समयबद्ध सेवा वितरण को मजबूत किए बिना भ्रष्टाचार पर स्थायी अंकुश लगाना आसान नहीं होगा।











