जबलपुर। एक ओर नगर निगम आयुक्त पूरे शहर को स्वच्छ, सुंदर और स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षित बनाने के लिए लगातार मैदान में उतरकर निरीक्षण कर रहे हैं। स्वच्छता व्यवस्था में सुधार, कचरा प्रबंधन और स्वच्छ सर्वेक्षण को लेकर अधिकारियों को लगातार सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जोन क्रमांक-14 के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली इन प्रयासों पर पानी फेरती नजर आ रही है।
जोन क्रमांक-14 के वार्ड क्रमांक-28 में स्थित नगर निगम की पेयजल टंकी, जहां से क्षेत्र के हजारों नागरिकों के घरों तक पानी की आपूर्ति होती है, उसके नीचे और आसपास पिछले कई महीनों से नगर निगम की कचरा गाड़ियां कचरा एकत्र कर रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यह स्थान धीरे-धीरे कचरा डंपिंग बिंदु का रूप ले चुका है। परिणामस्वरूप परिसर में गंदगी, दुर्गंध और अस्वच्छ वातावरण बना हुआ है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि जिस स्थान को स्वच्छ और सुरक्षित रखा जाना चाहिए, वहीं यदि कचरा एकत्र किया जा रहा है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। विशेषज्ञों के अनुसार पेयजल संरचनाओं के आसपास गंदगी रहने से संक्रमण फैलाने वाले कीट-पतंगे बढ़ सकते हैं, दुर्गंध फैल सकती है और कचरे से निकलने वाला दूषित तरल (लीचेट) आसपास के वातावरण को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में वहां नियमित सफाई और स्वच्छता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस स्थिति की जानकारी होने के बावजूद जोन-14 के स्वच्छता निरीक्षक, सहायक स्वच्छता निरीक्षक, वार्ड सुपरवाइजर्स और संबंधित जिम्मेदार कर्मचारी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। यदि यह आरोप सही हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला है बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति गंभीर उदासीनता भी दर्शाता है।
यह भी सवाल उठ रहा है कि आखिर नगर निगम की कचरा गाड़ियों को पेयजल टंकी परिसर में कचरा एकत्र करने की अनुमति किसने दी? यदि यह अधिकृत डंपिंग स्थल नहीं है, तो वहां इस प्रकार की गतिविधियां क्यों जारी हैं? यदि यह अधिकृत स्थल है, तो क्या सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी सभी आवश्यक मानकों का पालन किया जा रहा है? इन सवालों के स्पष्ट जवाब मिलना जरूरी है।
शहरवासियों का कहना है कि जिस स्थान से लोगों के घरों तक पेयजल पहुंचता है, वहां स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि गंदगी का अंबार। नगर निगम का दायित्व है कि ऐसे संवेदनशील स्थलों को पूरी तरह साफ-सुथरा रखा जाए ताकि किसी भी प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी खतरे की आशंका न रहे।
स्थानीय नागरिकों ने नगर निगम आयुक्त से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित स्वच्छता निरीक्षक, सहायक स्वच्छता निरीक्षक, वार्ड सुपरवाइजर्स तथा जिम्मेदार कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही पेयजल टंकी परिसर से तत्काल कचरा हटाकर वहां स्थायी रूप से स्वच्छता सुनिश्चित की जाए, ताकि नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी प्रकार का जोखिम न जुड़ा रहे।









