जयपुर, 4 दिसंबर 2025। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत केंद्र सरकार ने ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यूटिलिटी लेड एग्रीगेशन (यूएलए) मॉडल को तेज गति से आगे बढ़ाया है। राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने इस मॉडल की प्रगति, भुगतान व्यवस्था और राज्यों को दी गई स्वीकृतियों को लेकर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से विस्तृत जवाब मांगा था, जिसके उत्तर में सरकार ने योजना को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं।
राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न पर मंत्रालय के राज्यमंत्री श्रीपाद नाईक ने बताया कि यूएलए मॉडल का मुख्य लक्ष्य डिस्कॉम और राज्य स्तरीय एजेंसियों के माध्यम से कम आय वाले परिवारों के घरों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाना है, ताकि वे सौर ऊर्जा द्वारा उत्पन्न बिजली का मुफ्त लाभ उठा सकें। उनके अनुसार, यह मॉडल उन परिवारों को सीधा लाभ पहुंचाता है, जिनके लिए परंपरागत बिजली बिल एक बड़ा आर्थिक बोझ होता है।
संसद में राठौड़ ने उठाया मुद्दा—“गरीब परिवारों के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल”
राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना देश के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए वास्तविक परिवर्तन ला सकती है। उन्होंने बताया कि सरकार ने यूएलए मॉडल को लागू करते हुए परिचालन दिशा-निर्देशों में संशोधन किए हैं, ताकि डिस्कॉम और वेंडर दोनों के लिए प्रक्रिया सरल और पारदर्शी बन सके।
राठौड़ के अनुसार, पेमेंट रिलीज़ मैकेनिज्म को भी बदला गया है। अब सोलर सिस्टम के सफल इंस्टॉलेशन और परीक्षण के तुरंत बाद केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) एकल किस्त के रूप में सीधे वेंडर के खाते में भेजी जाती है। यह व्यवस्था न केवल देरी को रोकती है, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावना को भी समाप्त करती है। उन्होंने कहा कि यह मोदी सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही की नीति का उदाहरण है।
9 राज्यों को मिली सैद्धांतिक मंजूरी — 10,37,543 इंस्टॉलेशन का लक्ष्य
सरकार ने अब तक इस मॉडल को 9 राज्यों और केंद्रशासित क्षेत्रों में लागू करने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इनमें शामिल हैं—
आंध्र प्रदेश, ओडिशा, असम, केरल, जम्मू-कश्मीर, अंडमान-निकोबार, लद्दाख, दादरा और नगर हवेली–दमन-दीव और तेलंगाना।
इन राज्यों में कुल 10,37,543 रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन को स्वीकृति प्रदान की गई है। यह संख्या अपने आप में दर्शाती है कि आने वाले महीनों में योजना बड़े स्तर पर गति पकड़ने वाली है।
राठौड़ ने कहा कि “यह सिर्फ एक ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम है। यदि गरीब परिवारों को महीने का बिजली खर्च शून्य करना संभव होता है, तो यह उनके बजट में बड़ी राहत पैदा करेगा और उनकी आर्थिक क्षमता को मजबूत करेगा।”
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
मदन राठौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऊर्जा आत्मनिर्भरता और गरीब परिवारों के उत्थान को केंद्र में रखकर सूर्य घर योजना को एक ऐतिहासिक क्रांति का रूप दिया जा रहा है। यूएलए मॉडल के विस्तार से देश में स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की गति और बढ़ेगी और लाखों परिवार इस योजना से सीधे लाभान्वित होंगे।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह मॉडल देश की ऊर्जा संरचना को बदलने के साथ-साथ आने वाले वर्षों में वितरण कंपनियों पर भार कम करेगा और उपभोक्ताओं के बिल लगभग समाप्त करने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा।










