रामगढ़ बांध में कृत्रिम बारिश का पहला प्रयास नाकाम, बादल ऊंचाई पर थे; कंपनी बोली—7 से 10 दिन में मिलेगा ऊंचाई पर उड़ाने की अनुमति, फिर करेंगे असली क्लाउड सीडिंग
जयपुर |
राजस्थान की राजधानी जयपुर के रामगढ़ बांध इलाके में मंगलवार को ड्रोन के जरिए कृत्रिम बारिश करवाने का पहला प्रयास फेल हो गया। वजह रही—बादलों की ऊंचाई और उड़ान अनुमति की सीमा। ड्रोन को अधिकतम 400 फीट तक उड़ाने की अनुमति थी, जबकि बारिश के लिए जरूरी बादल इससे कहीं ऊपर थे।
क्लाउड सीडिंग करने वाली जेन एक्स एआई कंपनी के डायरेक्टर अजिंक्या धूमबाड़े ने बताया कि यह केवल डेमो था। 7 से 10 दिन में ज्यादा ऊंचाई पर उड़ाने की मंजूरी मिल जाएगी, जिसके बाद असली प्रयोग होगा।
ड्रोन उड़ान में आई अड़चनें
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पहले प्रयास में ड्रोन जमीन से उठने के बाद झाड़ियों में फंस गया।
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दूसरे प्रयास में यह 400 फीट तक पहुंचा, लेकिन भीड़ के कारण GPS सिग्नल बाधित हुआ।
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मौके पर कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा मौजूद थे। उन्होंने सोशल मीडिया X पर दावा किया कि डेमो सफल रहा।
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प्रयोग में अमेरिका और बेंगलुरु की टीम भी शामिल थी।
पहले भी नाकाम रही है कोशिश
दो साल पहले चित्तौड़गढ़ के बेसुना बांध पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च कर प्लेन से कृत्रिम बारिश कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन बारिश नहीं हुई।
पूजा-पाठ और हवन भी हुआ
ड्रोन उड़ाने से पहले वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने विधिवत पूजा और हवन किया, जो लगभग 3 घंटे चला। आलोचकों का कहना है कि अगर प्राकृतिक संकेतों और आस्था पर भरोसा था, तो रामगढ़ बांध को प्राकृतिक तरीकों से भरने की कोशिश करनी चाहिए थी।
सरकार पर सवाल
स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं कि कृत्रिम बारिश पर करोड़ों खर्च करने की बजाय, अगर इसका एक चौथा हिस्सा भी बांध के रास्तों में हो रहे अवैध अतिक्रमण हटाने पर लगाया जाता, तो आज रामगढ़ बांध की हालत इतनी खराब नहीं होती।
तथ्य एक नजर में
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स्थान: रामगढ़ बांध, जयपुर
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तकनीक: ड्रोन आधारित क्लाउड सीडिंग
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सीमा: 400 फीट तक उड़ान की अनुमति
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कंपनी: जेन एक्स एआई (अमेरिका और बेंगलुरु आधारित)
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अगला चरण: 7–10 दिन में ऊंचाई पर उड़ान की मंजूरी मिलने पर प्रयोग
💬 आपकी राय: क्या कृत्रिम बारिश पर करोड़ों खर्च करना सही कदम है, या प्राकृतिक जल स्रोतों की देखरेख ज्यादा जरूरी है? नीचे कमेंट में बताएं।










