बेंगलुरु की सड़कों पर IPL ट्रॉफी का जश्न मातम में बदल गया। 4 जून को RCB की पहली खिताबी जीत के बाद निकली विक्ट्री परेड में भगदड़ मच गई, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई और 50 से ज्यादा घायल हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक चिन्नास्वामी स्टेडियम की क्षमता महज़ 35,000 थी, लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट्स और “फ्री पास” की अफरातफरी से 3 लाख से ज्यादा लोग उमड़ पड़े। गेट टूटे, निकासी-प्रवेश सिस्टम ध्वस्त हुआ और आयोजन में सुरक्षा-व्यवस्था की भारी कमी उजागर हो गई। सरकार की जांच में सामने आया कि RCB ने इस परेड के लिए विधिवत अनुमति ही नहीं ली थी, वहीं आयोग ने स्टेडियम को बड़े आयोजनों के लिए असुरक्षित करार दिया।
RCB ने मृतकों के परिवारों को 25-25 लाख रुपए की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है, लेकिन सवाल यही है—क्या यह मुआवज़ा जिम्मेदारी और न्याय की भरपाई कर सकता है? पीड़ित परिवार जवाबदेही और ठोस सुधार की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि “भगदड़ कहीं भी हो सकती है।” विपक्ष इसे जिम्मेदारी से बचने की कोशिश बता रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या भविष्य में बड़े आयोजनों के लिए भीड़ सुरक्षा ऑडिट, इमरजेंसी प्लान और सख़्त परमिशन सिस्टम लागू होंगे, या फिर यह घटना भी सिर्फ़ आंकड़ों और मुआवज़े में सिमटकर रह जाएगी।












