अजमेर/जयपुर, महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती के अवसर पर परोपकारिणी सभा, अजमेर द्वारा आयोजित ‘ऋषि मेला’ में भाजपा के वरिष्ठ नेता और हरियाणा संगठन प्रभारी डॉ. सतीश पूनियां ने भाग लिया। इस मौके पर संतों और विद्वानों ने सतीश पूनियां के नेतृत्व की प्रशंसा की, खासकर हरियाणा और राजस्थान में भाजपा की सफल सरकारों के लिए उनके परिश्रम को सराहा।
संतों का आशीर्वाद और भाजपा की सफलताएं
ऋषि मेला में स्वामी ओमानंद सरस्वती ने डॉ. सतीश पूनियां के पुरुषार्थ और मेहनत को भाजपा की सफल सरकारों का आधार बताया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, सतीश पूनियां के परिश्रम से हरियाणा में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनी, जो इतिहास में पहली बार हुआ।” उन्होंने पूनियां के राजस्थान और हरियाणा के कार्यकर्ताओं से जुड़े रहने और उनकी मेहनत को भी रेखांकित किया, जिसने भाजपा को लगातार सफलता दिलाई।
महर्षि दयानंद सरस्वती की शिक्षा पर बल
डॉ. सतीश पूनियां ने अपने संबोधन में महर्षि दयानंद सरस्वती के योगदान का उल्लेख किया, जिन्होंने समाज को अनेक कुरीतियों से मुक्त किया। उन्होंने कहा, “महर्षि दयानंद सरस्वती ने समाज सुधार के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया। उनकी शिक्षाएं नई पीढ़ी के लिए सदैव प्रेरणादायक रहेंगी।”

पूनियां ने महर्षि दयानंद और गुरु गोविंद सिंह के विचारों में समानता की बात भी की, जिनके विचारों और संघर्ष ने देश में जन जागरण की लहर जगाई। उन्होंने बताया कि ये दोनों महापुरुष उनके जीवन पर सबसे अधिक प्रभाव डालने वाले व्यक्तित्व रहे हैं।
वेदों की शक्ति और वैश्विक महत्व
डॉ. पूनियां ने भारत की वैदिक परंपरा को रेखांकित करते हुए कहा कि वेदों का ज्ञान न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “कोरोना महामारी के दौरान भी आरोग्य के लिए वेदों की अहमियत स्पष्ट हुई। नासा द्वारा किए गए अनुसंधान भी वेदों पर आधारित होते हैं। वैदिक संस्कृति ही भविष्य में दुनिया को दिशा देगी।”
समारोह में सम्मान
इस अवसर पर, परोपकारिणी सभा के प्रधान ओम मुनि, मंत्री कन्हैयालाल आर्य और उप प्रधान जय सिंह गहलोत ने डॉ. सतीश पूनियां को स्मृति चिह्न और शॉल भेंट कर सम्मानित किया। समारोह में संत सच्चिदानंद सरस्वती सहित कई विद्वानों ने भी अपने विचार रखे और महर्षि दयानंद सरस्वती के दिखाए मार्ग पर चलने की अपील की।

महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती के अवसर पर आयोजित ऋषि मेला ने भारत की सांस्कृतिक धरोहर और भाजपा के नेतृत्व में संतों के आशीर्वाद की भूमिका को उजागर किया।












