जयपुर, 21 अक्टूबर का दिन भारतीय इतिहास में एक गौरवशाली क्षण के रूप में याद किया जाता है। यह वही दिन है जब महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में सिंगापुर में “आज़ाद हिंद सरकार” की स्थापना की गई थी। इस ऐतिहासिक अवसर को सम्मानित करने के लिए राष्ट्रीय कायस्थ सेवा संघ ने “गौरव दिवस” का आयोजन किया।
कार्यक्रम का नेतृत्व और नेताजी को श्रद्धांजलि
इस कार्यक्रम का नेतृत्व संघ के प्रमुख पदाधिकारी—वेद आशीष श्रीवास्तव, ललित सक्सेना, अमित सक्सेना, और नितिन श्रीवास्तव—ने किया। इस अवसर पर सभी सदस्यों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की देशभक्ति, संघर्ष और बलिदान को नमन किया। नेताजी की अदम्य इच्छाशक्ति और उनके योगदान को स्मरण करते हुए, संघ के सदस्यों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
“जय हिंद” का उद्घोष और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता
यह वही दिन है जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने “जय हिंद” का उद्घोष किया था, जो उस समय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय एकता और सम्मान का प्रतीक बन गया। यह नारा आज भी हर भारतीय के हृदय में जोश और गर्व की भावना भर देता है।
नेताजी की विचारधारा और देश सेवा का संकल्प
गौरव दिवस के अवसर पर संघ के सदस्यों ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विचारधारा को याद करते हुए, उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने और देश की सेवा करने का संकल्प लिया। उन्होंने भविष्य की पीढ़ियों को इस गौरवशाली इतिहास से अवगत कराने और नेताजी के नेतृत्व के महत्व को बनाए रखने का प्रण लिया। नेताजी के “जय हिंद” के नारे ने स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा और दिशा दी थी, जो आज भी हमें प्रेरित करता है।
देशभक्ति की भावना का संचार
कार्यक्रम के अंत में संघ के सभी सदस्यों ने एकजुट होकर नेताजी की देशभक्ति को सम्मानित किया और उनकी प्रेरणादायक यात्रा से सीख लेते हुए देश के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करने का दृढ़ संकल्प लिया।











