मिसरोद थाना प्रभारी के वायरल वीडियो पर कार्रवाई, निरीक्षक रतनलाल सिंह परिहार निलंबित; आदिवासी समाज ने मांगी सार्वजनिक माफी
निलंबन के साथ 15 दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश, गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन ने छात्र समस्याओं को लेकर उठाईं छह सूत्रीय मांगें
भोपाल। मिसरोद थाना प्रभारी निरीक्षक रतनलाल सिंह परिहार का कथित अभद्र टिप्पणी से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामले को लेकर आदिवासी समाज और गोंडवाना आंदोलन से जुड़े संगठनों में नाराजगी सामने आई है। विरोध से जुड़े पोस्टरों के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री डॉ. मोहन यादव से सार्वजनिक माफी की मांग भी की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस उपायुक्त (जोन-2, नगरीय पुलिस भोपाल) विकास कुमार शाहवाल द्वारा जारी निलंबन आदेश में संबंधित निरीक्षक के आचरण को सेवा नियमों के प्रतिकूल बताते हुए विभाग की छवि प्रभावित होने का उल्लेख किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय रक्षित केंद्र, भोपाल निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
15 दिन में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश
मामले की विस्तृत जांच के लिए सहायक पुलिस आयुक्त, एमपी नगर, भोपाल को जिम्मेदारी सौंपी गई है। आदेश के अनुसार, वायरल वीडियो की पेनड्राइव प्राप्त कर निष्पक्ष जांच करते हुए 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में वीडियो से संबंधित तथ्यों और संबंधित अधिकारी के आचरण का परीक्षण किया जाना है।
निलंबन से संतुष्ट नहीं, सार्वजनिक माफी की मांग
निलंबन की कार्रवाई के बावजूद आदिवासी समाज से जुड़े संगठनों और गोंडवाना आंदोलन के समर्थकों में नाराजगी बनी हुई है। विरोध पोस्टरों के माध्यम से समाज के स्वाभिमान, सम्मान और जवाबदेही का मुद्दा उठाया गया है। प्रदर्शन से जुड़े लोगों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
विरोध से जुड़े पोस्टरों में मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री डॉ. मोहन यादव से सार्वजनिक माफी की मांग भी की गई है। वहीं, ‘जय जोहार, जय गोंडवाना’ के नारों के माध्यम से आदिवासी समाज के सम्मान और न्याय का मुद्दा उठाया गया है।
छात्र समस्याओं को लेकर GSU का ‘भोपाल चलो’ आह्वान
इसी बीच गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन (GSU), मध्य प्रदेश की ओर से छात्र-छात्राओं की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर ‘भोपाल चलो’ का आह्वान किया गया है। संगठन ने मुख्यमंत्री निवास के घेराव का कार्यक्रम घोषित किए जाने की जानकारी दी है। संगठन की मांगों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार से लेकर छात्रवृत्ति, नर्सिंग परीक्षाओं और शिक्षकों की भर्ती तक के मुद्दे शामिल हैं।
GSU की छह सूत्रीय प्रमुख मांगें
1. शिक्षा व्यवस्था में सुधार: प्रदेश की प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किया जाए।
2. परीक्षा से वंचित करने पर रोक: बकाया फीस के कारण किसी भी छात्र-छात्रा को निजी स्कूल या कॉलेज की मुख्य परीक्षा में शामिल होने से वंचित नहीं किया जाए।
3. आवास सहायता और छात्रवृत्ति: विद्यार्थियों की आवास सहायता राशि बढ़ाकर 4,000 रुपये प्रतिमाह की जाए तथा अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति शैक्षणिक सत्र पूरा होने से पहले वितरित की जाए।
4. नर्सिंग विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान: नर्सिंग परीक्षाएं निर्धारित समय-सीमा में आयोजित की जाएं तथा पंजीयन व्यवस्था में सुधार किया जाए।
5. अकादमिक कैलेंडर और हेल्पलाइन: प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में अकादमिक कैलेंडर लागू किया जाए और विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाएं।
6. शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती: प्रदेश में रिक्त पड़े शिक्षक पदों पर जल्द से जल्द सीधी भर्ती की जाए।
जांच और प्रशासनिक जवाबदेही पर टिकी निगाहें
मिसरोद थाना प्रभारी के वायरल वीडियो को लेकर हुई निलंबन कार्रवाई और आदिवासी संगठनों की मांगों ने मामले को चर्चा में ला दिया है। अब पुलिस विभाग की जांच रिपोर्ट और शासन स्तर पर होने वाली आगामी कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं। दूसरी ओर, GSU की छह सूत्रीय मांगों ने शिक्षा व्यवस्था और छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
फिलहाल, वायरल वीडियो से जुड़े आरोपों की जांच पूरी होने के बाद ही मामले के तथ्यों और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।










