करीब 300 करोड़ की अमृत जल योजना पर सवाल, पाइपलाइन के बाद सड़कें बदहाल
काँचघर से बर्न कंपनी रेलवे स्टेशन रोड तक गड्ढों का जाल, जनता पूछ रही—विकास के नाम पर आखिर यह कैसी सुविधा, जबलपुर में मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान हुआ फेल
जबलपुर। शहर में करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से अमृत जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध कराना है, लेकिन दूसरी ओर पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों की बदहाली ने आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, निगरानी और सड़क बहाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, योजना में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग भी जरूरी हो गई है।
काँचघर से बर्न कंपनी रेलवे कोचिंग डिपो तक सड़क की हालत ऐसी हो गई है कि इस पर चलना किसी चुनौती से कम नहीं है। जगह-जगह गड्ढे और उखड़ी सड़क वाहन चालकों, विद्यार्थियों, मरीजों और रोजाना आवागमन करने वाले हजारों लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
सड़क की स्थिति पर तंज कसते हुए कहा जा सकता है कि यह मार्ग अब सड़क कम और गड्ढों से भरा ऐसा रास्ता ज्यादा नजर आता है, जहां वाहन का सस्पेंशन ही सबसे बड़ी परीक्षा देता है। लेकिन इस हास्य के पीछे आम नागरिकों की गंभीर परेशानी छिपी है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा है, जबकि श्रम अस्पताल जाने वाले मरीजों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
अनुसूचित जाति-जनजाति बहुल क्षेत्र की उपेक्षा क्यों?
काँचघर से बर्न कंपनी तक के क्षेत्र में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग सहित विभिन्न समुदायों के लोग निवास करते हैं। स्थानीय नागरिकों के लिए सड़क की बदहाली और मूलभूत सुविधाओं की कमी रोजमर्रा की परेशानी बन गई है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इस क्षेत्र की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से क्यों नहीं किया जा रहा है?
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के नागरिकों सहित प्रत्येक वर्ग को बेहतर सड़क, सुरक्षित आवागमन और अन्य मूलभूत सुविधाएं प्राप्त करने का समान अधिकार है। यदि किसी क्षेत्र में लंबे समय तक सड़क निर्माण और बुनियादी सुविधाओं की समस्याएं बनी रहती हैं, तो प्रशासन की जवाबदेही तय होनी चाहिए। स्थानीय लोगों की मांग है कि उनकी समस्याओं को भी गंभीरता से सुना जाए और विकास कार्यों में किसी भी क्षेत्र के साथ उपेक्षा न हो।
सवाल यह है कि क्या इस क्षेत्र की जनता की परेशानियां जिम्मेदारों को दिखाई नहीं देतीं? लोकतंत्र में विकास का लाभ हर नागरिक तक पहुंचना चाहिए। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए तथा सड़क निर्माण में हो रही देरी का जवाब देना चाहिए।
मुख्यमंत्री की मंशा बेहतर सुविधाओं की, फिर जबलपुर में सड़कें बदहाल क्यों?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा प्रदेश के नागरिकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। सरकार जन विश्वास अभियान के माध्यम से भी जनता का भरोसा मजबूत करने पर जोर दे रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सड़कें बदहाल रहें, तो जनता का विश्वास कैसे कायम रहेगा?
जबलपुर में भव्य दशहरा पर्व भी निकल गया, लेकिन काँचघर से बर्न कंपनी तक सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने से स्थानीय लोगों की परेशानी बनी हुई है। यह मार्ग रेलवे के विभिन्न कार्यालयों, रेलवे कोचिंग डिपो, पावर हाउस, रेलवे सराय स्कूल, श्रम अस्पताल, संभागीय हाट बाजार, ललित कला निकेतन और महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों को जोड़ता है। प्रतिदिन हजारों लोगों का इस मार्ग से आवागमन होता है।
जिम्मेदार विभागों से जनता के सीधे सवाल
पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़क का पुनर्निर्माण कब होगा? निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निगरानी किसने की? सड़क सुधारने की जिम्मेदारी किस विभाग या एजेंसी की है? करीब 300 करोड़ रुपये की योजना के कार्यों की गुणवत्ता और सड़क बहाली की जांच कब होगी? यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं, तो जवाबदेही किसकी तय की जाएगी?
नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और संबंधित कार्यदायी एजेंसियों को चाहिए कि वे तत्काल मौके का निरीक्षण करें, सड़क की स्थिति और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराएं तथा सड़क निर्माण पूरा करने की समय-सीमा सार्वजनिक करें।
विकास के दावों के बीच जनता को राहत का इंतजार
विकास का अर्थ केवल पाइपलाइन बिछाना नहीं, बल्कि नागरिकों को सुरक्षित सड़क, सुगम आवागमन और बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है। योजना का लाभ तभी सार्थक होगा, जब पाइपलाइन के साथ-साथ सड़क की बहाली का काम भी जिम्मेदारी से पूरा किया जाए।
अब जनता को आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए। सवाल साफ है—काँचघर से बर्न कंपनी तक सड़क का निर्माण कब होगा, जिम्मेदार अधिकारी कब जागेंगे और क्षेत्र के नागरिकों को इस बदहाली से राहत कब मिलेगी?










