जबलपुर में नवागत कलेक्टर का सख्त रुख: सीएम हेल्पलाइन और राजस्व प्रकरणों पर कसा शिकंजा, आज शाम फिर होगी समीक्षा बैठक
जबलपुर। मध्यप्रदेश में हुए प्रशासनिक फेरबदल के बाद संस्कारधानी जबलपुर में जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करने की कवायद तेज हो गई है। नवागत कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने पदभार संभालने के बाद लंबित राजस्व प्रकरणों और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को प्राथमिकता पर लेते हुए अधिकारियों को समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
इसी क्रम में आज सुबह 10 बजे कलेक्टर कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में लंबित शिकायतों और राजस्व मामलों की प्रगति पर चर्चा की गई। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक गहलोत, अपर कलेक्टरों सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित रहे।
अधीनस्थों के भरोसे न छोड़ें जिम्मेदारी, स्वयं करें निगरानी
कलेक्टर ने सभी अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीएम) को निर्देशित किया कि वे केवल अधीनस्थ कर्मचारियों के भरोसे न रहें, बल्कि स्वयं सक्रिय होकर शिकायतों की स्थिति की निगरानी करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का निराकरण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आम नागरिकों की समस्याओं के वास्तविक समाधान का माध्यम होना चाहिए।
लंबित शिकायतों के निराकरण में लापरवाही और अनावश्यक देरी को गंभीरता से लेने की बात कहते हुए अधिकारियों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने के निर्देश दिए गए।
जबरन बंद शिकायतों की होगी दोबारा जांच
राजस्व विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद करने तथा उनकी समस्याओं का वास्तविक समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, फोर्स क्लोज की गई शिकायतों की दोबारा जांच कर यह पता लगाने पर जोर दिया गया कि संबंधित प्रकरणों का निराकरण वास्तव में हुआ है या नहीं।
कलेक्टर ने राजस्व विभाग को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करते हुए जबलपुर जिले की प्रदेश स्तर पर रैंकिंग बेहतर बनाने और प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए ठोस प्रयास करने को कहा।
शाम 5:45 बजे फिर होगी समीक्षा, अधिकारियों को देनी होगी प्रगति रिपोर्ट
बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे शिकायतों के निराकरण में तेजी लाएं और प्रत्येक प्रकरण की वास्तविक स्थिति से अवगत रहें। इसी क्रम में आज शाम 5:45 बजे पुनः समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें सभी एसडीएम को विभागवार प्रगति रिपोर्ट के साथ उपस्थित होना होगा।
कलेक्टर के इस रुख से लंबित शिकायतों के निराकरण को लेकर जिला प्रशासन की जवाबदेही बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अब देखना होगा कि बैठक में दिए गए निर्देशों का धरातल पर कितना असर दिखाई देता है और आम नागरिकों को लंबित मामलों से कितनी राहत मिलती है।









