नगर निगम में काम नहीं, जुगाड़ का बोलबाला!
ट्रांसफर-पोस्टिंग पर उठे सवाल, दो संभागों में दो-दो आरआई तो दो संभाग आरआई विहीन
जबलपुर। नगर निगम में राजस्व निरीक्षकों (आरआई) की हालिया तबादला प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि पदस्थापना में कार्य की आवश्यकता, वरिष्ठता और संभागों में कर्मचारियों की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। इसके चलते निगम के राजस्व विभाग में असंतुलन की स्थिति बनने की बात कही जा रही है। एक ओर कुछ संभागों में दो-दो राजस्व निरीक्षक पदस्थ हो गए हैं, वहीं दूसरी ओर संभाग क्रमांक एक और चार में आरआई का पद खाली होने की स्थिति बताई जा रही है।
एक संभाग में दो आरआई की जरूरत पर सवाल
नगर निगम के 16 संभागीय कार्यालयों में राजस्व वसूली, बाजार लाइसेंस, जलकर और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों की जिम्मेदारी राजस्व निरीक्षकों पर होती है। ऐसे में एक ही संभाग में दो आरआई की पदस्थापना और दूसरे संभागों में इस पद का रिक्त रहना प्रशासनिक संतुलन पर सवाल खड़े करता है। व्यवस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि पदस्थापना कार्यभार और राजस्व वसूली की आवश्यकता के आधार पर होनी चाहिए, ताकि सभी संभागों में कामकाज सुचारु रूप से चल सके।
तबादला आदेशों के बाद बदली पदस्थापना व्यवस्था
हाल ही में जारी आदेशों के अनुसार, संभाग क्रमांक एक में पदस्थ आरआई इजराइल खान को संभाग क्रमांक छह में स्थानांतरित किया गया है, जहां वरिष्ठ राजस्व निरीक्षक अरविंद श्रीवास्तव पहले से पदस्थ बताए गए हैं। इसी तरह मुख्यालय में पदस्थ मधुलिका चौधरी को संभाग क्रमांक पांच में पदस्थ किया गया है, जहां कोणार्क रावत पहले से कार्यरत बताए गए हैं।
दूसरी ओर, संभाग क्रमांक एक में आरआई का पद रिक्त होने की स्थिति बताई जा रही है। संभाग क्रमांक चार में पदस्थ आरआई को संभागीय अधिकारी का दायित्व सौंपे जाने के कारण वहां भी राजस्व निरीक्षक की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इन परिस्थितियों में संबंधित संभागों में राजस्व संबंधी कार्यों के संचालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
वरिष्ठता और कार्य-विभाजन पर भी उठे सवाल
तबादला प्रक्रिया को लेकर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि पदस्थापना के दौरान अधिकारियों की वरिष्ठता, कार्यानुभव और संबंधित संभागों की जरूरतों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और निगम प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए तबादला आदेशों के आधार और कार्य-विभाजन की स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।
राजस्व वसूली प्रभावित होने की आशंका
संभागों में आरआई के पद रिक्त रहने से संपत्ति कर, जलकर, बाजार लाइसेंस और अन्य राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, एक ही संभाग में दो आरआई की पदस्थापना होने पर जिम्मेदारियों के स्पष्ट बंटवारे की आवश्यकता होगी, ताकि कामकाज में दोहराव या अनावश्यक देरी न हो।
त्योहारी सीजन में नगर निगम के लिए राजस्व वसूली का लक्ष्य महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में सभी संभागों में पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता और स्पष्ट कार्य-विभाजन जरूरी है। यदि समय रहते व्यवस्था में संतुलन नहीं बनाया गया, तो राजस्व वसूली के लक्ष्य को पूरा करने में कठिनाई आ सकती है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर निगम से स्पष्टीकरण की अपेक्षा
इस पूरे मामले में नगर निगम प्रशासन से यह स्पष्ट किए जाने की अपेक्षा है कि संबंधित संभागों में आरआई की पदस्थापना किस आधार पर की गई, रिक्त पदों पर वैकल्पिक व्यवस्था क्या है और राजस्व वसूली प्रभावित न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही, वरिष्ठता और कार्यभार के अनुरूप पदस्थापना सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी सामने आ रही है।
अब सवाल यह है कि क्या निगम प्रशासन सभी संभागों में संतुलित पदस्थापना सुनिश्चित कर राजस्व वसूली की व्यवस्था को सुचारु बनाएगा, या तबादलों के बाद पैदा हुई स्थिति का असर शहर के राजस्व कार्यों पर पड़ता रहेगा?









