भेड़ाघाट में बनेगा विश्वस्तरीय जियोलॉजिकल पार्क और म्यूजियम

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भेड़ाघाट में बनेगा विश्वस्तरीय जियोलॉजिकल पार्क और म्यूजियम

 

केंद्र सरकार ने ₹87 करोड़ की परियोजना को दी मंजूरी, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा नया विस्तार

 

जबलपुर। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट अब प्राकृतिक सौंदर्य के साथ भू-विज्ञान, इतिहास और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के एक नए केंद्र के रूप में विकसित होने जा रहा है। भेड़ाघाट में विश्वस्तरीय जियोलॉजिकल पार्क, जियोलॉजिकल म्यूजियम और इंटरप्रिटेशन सेंटर विकसित करने की करीब 87 करोड़ रुपये की परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आई है।

 

यह परियोजना स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के माध्यम से करीब 12 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जाएगी। परियोजना के आकार और प्रस्तावित सुविधाओं से भेड़ाघाट को प्राकृतिक पर्यटन के साथ-साथ विज्ञान, शिक्षा और अनुभव आधारित पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।

 

राकेश सिंह के प्रयासों को बताया महत्वपूर्ण कड़ी

 

परियोजना की स्वीकृति को लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह की लंबे समय से जारी पहल से जोड़ा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, श्री सिंह ने परियोजना की परिकल्पना को आगे बढ़ाने, विस्तृत प्रस्ताव तैयार कराने और संबंधित विभागों के बीच समन्वय के साथ केंद्र स्तर पर स्वीकृति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में लगातार पहल की।

 

18 जनवरी 2024 को मंत्रालय में जियो पार्क की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और डिजाइन का प्रस्तुतीकरण भी श्री सिंह के समक्ष किया गया था। इस दौरान उन्होंने परियोजना के निर्माण को भेड़ाघाट के प्राकृतिक परिवेश के अनुरूप रखने तथा संग्रहालय को आकर्षक और ज्ञानवर्धक बनाने पर जोर दिया था।

 

परियोजना में लम्हेटा फॉर्मेशन, रानी दुर्गावती और जबलपुर की भू-सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता देने की बात भी सामने आई थी। इसके साथ ही नेचर वॉक, प्रकृति आधारित पर्यटन, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और पर्यटकों के ठहराव को बढ़ाने जैसी गतिविधियों को भी परियोजना का हिस्सा बनाया गया है।

 

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का जताया आभार

 

मंत्री राकेश सिंह ने इस परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया है।

 

उन्होंने कहा कि भेड़ाघाट केवल जबलपुर ही नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश की पहचान है। यहां की संगमरमर की चट्टानें, धुआंधार जलप्रपात और नर्मदा नदी देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। जियोलॉजिकल पार्क और म्यूजियम इस पहचान को एक नया विस्तार देगा।

 

उन्होंने कहा कि जबलपुर की प्राकृतिक और ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत करना उनकी प्राथमिकताओं में रहा है और इस परियोजना की स्वीकृति उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

 

90 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र हरित रखने का लक्ष्य

 

परियोजना में करीब 5,745 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र प्रस्तावित है, जबकि परिसर के 90 प्रतिशत या उससे अधिक हिस्से को हरित रखने का लक्ष्य बताया गया है। प्राकृतिक भू-दृश्य और मौजूदा वृक्षों को सुरक्षित रखते हुए निर्माण किया जाएगा, ताकि पर्यटकों को प्रकृति के बीच रहते हुए भू-विज्ञान और विरासत को समझने का अवसर मिल सके।

 

स्थानीय लोगों को भी परियोजना से जोड़ने की योजना है। स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, खान-पान, गाइड सेवा और अन्य पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

 

छह थीम आधारित गैलरी और 130 से अधिक प्रदर्श

 

जियोलॉजिकल म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर परियोजना का प्रमुख आकर्षण होगा। प्रस्तावित परिसर में छह विषयगत गैलरियां और 130 से अधिक प्रदर्श विकसित किए जाने की योजना है।

 

यहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से भू-विज्ञान को सरल और रोचक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा। प्रस्तावित सुविधाओं में—

 

– 3डी मॉडलिंग

– इंटरैक्टिव टच टेबल

– डिजिटल पैनल

– इमर्सिव थिएटर

– टाइटेनोसॉर स्क्वायर

– डायनासोर पार्क

– फॉसिल गार्डन

– जियोलॉजिकल मेज

– रॉक गार्डन

– ट्री-टॉप वॉकवे

– ग्लास फ्लोर

– नेचर वॉक

– व्यूइंग डेक

 

जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

 

डायनासोर और करोड़ों वर्ष पुराने भू-इतिहास को जानेंगे पर्यटक

 

लम्हेटा फॉर्मेशन नर्मदा घाटी की महत्वपूर्ण भू-वैज्ञानिक पहचान है। भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट क्षेत्र में डायनासोर जीवाश्मों की खोज के कारण भी इसका विशेष वैज्ञानिक महत्व है। 2022 की रिपोर्टों में भी लम्हेटा क्षेत्र में जियो पार्क विकसित करने की योजना और नर्मदा घाटी में मिले डायनासोर जीवाश्मों का उल्लेख किया गया था।

 

प्रस्तावित संग्रहालय में पृथ्वी की उत्पत्ति से लेकर मध्यप्रदेश और नर्मदा घाटी के करोड़ों वर्ष पुराने भू-वैज्ञानिक इतिहास को आधुनिक तकनीक और इंटरैक्टिव माध्यमों से प्रदर्शित करने की योजना है। मध्यप्रदेश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की भू-सांस्कृतिक विशेषताओं को भी यहां प्रदर्शित किया जाएगा।

 

रेस्टोरेंट से लेकर ग्लैम्पिंग तक आधुनिक सुविधाएं

 

पर्यटकों की सुविधा के लिए परिसर में रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट, म्यूजियम शॉप, स्थानीय उत्पादों के लिए रिटेल क्षेत्र, पार्किंग और टिकटिंग जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं।

 

इसके अलावा ग्लैम्पिंग टेंट आधारित इको-रिसॉर्ट भी विकसित करने की योजना है। इससे भेड़ाघाट आने वाले पर्यटकों को केवल दिनभर घूमकर लौटने के बजाय यहां ठहरकर प्राकृतिक वातावरण का अनुभव लेने का अवसर मिलेगा।

 

पर्यटन के साथ रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद

 

परियोजना का एक बड़ा उद्देश्य पर्यटन को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ना भी है। पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ने से होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प, गाइड सेवा और अन्य पर्यटन गतिविधियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

 

भेड़ाघाट पहले से ही मार्बल रॉक्स, धुआंधार जलप्रपात, नर्मदा नदी और चौसठ योगिनी मंदिर के कारण देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। जियोलॉजिकल पार्क बनने के बाद यहां प्राकृतिक पर्यटन के साथ ज्ञान, विज्ञान, शिक्षा और अनुभव आधारित पर्यटन की नई संभावनाएं जुड़ेंगी।

 

यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क की दिशा में भी संभावना

 

परियोजना प्रस्ताव में भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट को प्राकृतिक श्रेणी में यूनेस्को की संभावित विश्व धरोहर सूची के लिए नामांकन डोजियर तथा भविष्य में यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क की संभावनाओं का भी उल्लेख किया गया है।

 

यदि परियोजना प्रस्ताव के अनुरूप विकसित होती है, तो इससे जबलपुर की प्राकृतिक और भू-वैज्ञानिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

 

18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य

 

प्रस्ताव के अनुसार करीब 87 करोड़ रुपये की परियोजना की क्रियान्वयन एजेंसी मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड होगी। परियोजना को 18 माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए सितंबर 2026 से फरवरी 2028 तक की समय-सीमा प्रस्तावित बताई गई है।

 

भेड़ाघाट की संगमरमरी चट्टानों और नर्मदा की प्राकृतिक खूबसूरती के बीच बनने वाला यह जियोलॉजिकल पार्क जबलपुर के पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना हो सकता है।

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