आयुक्त ने संभाली व्यवस्था, लेकिन जल विभाग की निगरानी पर सवाल—महापौर से भी स्थायी समाधान पर जवाबदेही की मांग

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रमनगरा की पाइपलाइन में बार-बार इश्यू क्यों?

आयुक्त ने संभाली व्यवस्था, लेकिन जल विभाग की निगरानी पर सवाल—महापौर से भी स्थायी समाधान पर जवाबदेही की मांग

उजला दर्पण | जबलपुर

जबलपुर शहर को पानी देने वाले रमनगरा जलशोधन संयंत्र की राइजिंग मेन में एक बार फिर लीकेज सामने आने से जलापूर्ति प्रभावित होने जा रही है। 120 एमएलडी क्षमता वाले संयंत्र में 1200 एमएम के बटरफ्लाई वाल्व में लीकेज सुधारने के लिए 26 सितंबर की शाम से 27 सितंबर की सुबह तक कई क्षेत्रों में पानी की सप्लाई प्रभावित रहेगी। नगर निगम की ओर से जरूरत के अनुसार टैंकरों से वैकल्पिक जलापूर्ति की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है।

आयुक्त के स्तर पर राहत व्यवस्था पर फोकस

जलापूर्ति बाधित होने की स्थिति में नागरिकों को परेशानी कम हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था और प्रभावित क्षेत्रों में टैंकर पहुंचाने पर जोर दिया गया है। नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार की भूमिका को इस मामले में नागरिक सुविधा और फील्ड व्यवस्था के दृष्टिकोण से देखा जा सकता है। आयुक्त ने पदभार संभालते समय भी सड़क, पानी, बिजली और सफाई जैसी मूलभूत नागरिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की बात कही थी।

लेकिन असली सवाल केवल खराबी के बाद राहत पहुंचाने का नहीं है।

आखिर पाइपलाइन बार-बार क्यों बिगड़ती है?

रमनगरा की पाइपलाइन और वाल्व में बार-बार सामने आने वाली तकनीकी समस्याएं अब जल विभाग की निगरानी और मेंटेनेंस व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं।

आखिर ऐसा क्या है कि पाइपलाइन में खराबी आने के बाद ही मरम्मत की प्रक्रिया शुरू होती है?

क्या राइजिंग मेन और बड़े वाल्वों की नियमित तकनीकी जांच होती है?

क्या संभावित लीकेज और कमजोर हिस्सों की पहले से पहचान की जाती है?

क्या पाइपलाइन की गुणवत्ता, वाल्व की स्थिति और निर्माण कार्य का नियमित तकनीकी ऑडिट किया जाता है?

अगर नियमित निरीक्षण होता है तो 1200 एमएम के बड़े वाल्व में लीकेज समय रहते क्यों नहीं पकड़ा गया?

जल विभाग आखिर करता क्या रहता है?

यह सवाल सीधे जल विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़ा है। हर बार खराबी के बाद मरम्मत, फिर जलापूर्ति प्रभावित और उसके बाद टैंकर व्यवस्था—क्या यही स्थायी समाधान है?

जल विभाग के उच्चाधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि रमनगरा संयंत्र की राइजिंग मेन और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण पाइपलाइनों के लिए प्रिवेंटिव मेंटेनेंस यानी खराबी से पहले रखरखाव की व्यवस्था क्या है।

यदि व्यवस्था मौजूद है, तो बार-बार तकनीकी समस्या क्यों सामने आती है?

और यदि ऐसी समस्या बार-बार सामने आती है तो उसके स्थायी तकनीकी समाधान की रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?

महापौर से भी स्थायी समाधान पर जवाब अपेक्षित

महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और जल विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के सामने अब केवल यह बताना पर्याप्त नहीं होगा कि खराबी ठीक कर दी जाएगी। नागरिक यह जानना चाहते हैं कि बार-बार होने वाली खराबी को रोकने के लिए स्थायी कार्ययोजना क्या है।

जनता टैक्स देती है और बदले में उसे नियमित मूलभूत सुविधाएं मिलना नगर निगम की जिम्मेदारी है। इसलिए सवाल यह नहीं कि आज टैंकर कितने लगाए जाएंगे; सवाल यह है कि कल फिर इसी पाइपलाइन में लीकेज न हो, इसके लिए क्या किया जा रहा है?

एक खराबी, कई इलाके प्रभावित

रमनगरा संयंत्र से जुड़ी खराबी का असर बिड़ला धर्मशाला, मेडिकल, त्रिपुरी, गुलौआ, राइट टाउन, रामेश्वरम, मनमोहन नगर, लक्ष्मीपुर, कोतवाली, मोतीनाला, आनंद नगर, लेमा गार्डन, सर्वोदय नगर, मदर टेरेसा, बेदी नगर, मिल्क स्कीम, किलकारी गार्डन, न्यू शोभापुर और राजीव नगर सहित कई क्षेत्रों पर पड़ना है। देवताल की उच्चस्तरीय टंकियों से होने वाली जलापूर्ति भी प्रभावित होगी।

इतने बड़े क्षेत्र की जलापूर्ति एक तकनीकी खराबी से प्रभावित होती है तो यह केवल तत्काल मरम्मत का विषय नहीं रह जाता। यह मेंटेनेंस, निगरानी, तकनीकी ऑडिट और जवाबदेही का विषय बन जाता है।

अब चाहिए स्थायी समाधान

आयुक्त स्तर पर नागरिकों को राहत देने के लिए वैकल्पिक जलापूर्ति की व्यवस्था करना जरूरी कदम है। लेकिन इसके साथ जल विभाग और निगम के जिम्मेदार उच्चाधिकारियों को यह भी बताना होगा कि रमनगरा की महत्वपूर्ण पाइपलाइन व्यवस्था में बार-बार आने वाली तकनीकी समस्याओं का स्थायी समाधान कब तक होगा।

जनता का सवाल साफ है—रमनगरा की पाइपलाइन कब तक बार-बार बिगड़ती रहेगी और जल विभाग कब खराबी का इंतजार करने के बजाय खराबी को पहले ही रोकने की व्यवस्था करेगा?

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