सरकारी/नजूल की जमीन निजी नाम पर कैसे हुई? ‘पट्टा खेल’ में किस-किस की भूमिका? अन्य जोनों में कार्रवाई का इंतजार

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आयुक्त महोदय की जांच वाली फाइल गायब होने की चर्चा तेज! दूसरे जोन में भी नजूल भूमि के फर्जी दस्तावेजों से निगम रिकॉर्ड में दर्ज होने की बात

जबलपुर। नगर निगम की सरकारी संपत्ति को निजी नाम पर 30 वर्ष के पट्टे पर दिए जाने के मामले ने राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कछपुरा संभाग में 57 वर्गमीटर निगम स्वामित्व की संपत्ति का पट्टा टैक्स कलेक्टर राजेश डेनियल की मां के नाम होने के मामले में आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने संपत्ति को निगम के आधिपत्य में लेकर जांच और कार्रवाई शुरू कराई है।

लेकिन इसी बीच निगम सूत्रों के हवाले से एक पुराना और गंभीर मामला भी सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, शहर के एक अन्य जोन में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी /नजूल भूमि को निगम रिकॉर्ड में दर्ज कर के प्रक्रिया पूरी कर दी गई। इस मामले में पूर्व में आयुक्त महोदय के निर्देश पर जांच भी कराई गई थी। जबकि कोई भी जमीन नगर निगम में तब दर्ज की जाती है जब जमीन के वैध दस्तावेज उपलब्ध हो।

जांच हुई तो फाइल कहां गई?

सूत्रों का दावा है कि जांच के बाद संबंधित प्रकरण की फाइल अब नगरनिगम में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर आयुक्त महोदय द्वारा कराई गई जांच की फाइल कहां गायब हो गई?

क्या फाइल का गायब होना महज संयोग है या किसी को बचाने का प्रयास? यदि सरकारी नजूल भूमि को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निगम रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था तो रिकॉर्ड में किस अधिकारी/कर्मचारी की 🆔 से सरकारी/नजूल की भूमि दर्ज की गई।और  पूरी प्रक्रिया को किस स्तर से मंजूरी मिली?

कब होगी जिम्मेदारों पर कार्रवाई?

अब निगमायुक्त से यह भी अपेक्षा की जा रही है कि पुराने प्रकरण की फाइल को तत्काल तलाश कराकर उसकी जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि जांच के बाद फाइल गायब कैसे हुई।

यदि जांच में तत्कालीन कर्मचारियों या अधिकारियों की भूमिका सामने आती है तो उनके विरुद्ध कार्रवाई कब होगी?

एक तरफ वर्तमान आयुक्त सरकारी संपत्ति के मामले में सख्ती दिखा रहे हैं, दूसरी तरफ पुराने प्रकरण की कथित गायब फाइल कई सवाल खड़े कर रही है। क्या दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच से निगम के राजस्व तंत्र में चल रहे ‘पट्टा खेल’ की पूरी तस्वीर सामने आएगी?

अब निगाहें श्रीमान आयुक्त महोदय की अगली कार्रवाई पर है।

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