78% दिव्यांगता के बावजूद हिमांशु सोनी बने डिप्टी कलेक्टर, जबलपुर कलेक्ट्रेट में संभाला पदभार
जबलपुर। दृढ़ संकल्प, अथक परिश्रम और अटूट आत्मविश्वास के सामने शारीरिक सीमाएँ भी छोटी पड़ जाती हैं। इस कथन को चरितार्थ कर दिखाया है मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी हिमांशु सोनी ने। पंडित मोतीलाल नेहरू वार्ड के रहने वाले हिमांशु ने 78 प्रतिशत अस्थि दिव्यांगता और लगभग 20 प्रतिशत दृष्टि कमजोरी जैसी गंभीर चुनौतियों के बावजूद मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की प्रतिष्ठित परीक्षा उत्तीर्ण कर डिप्टी कलेक्टर का पद प्राप्त किया है।
विशेष बात यह है कि हिमांशु सोनी को उनकी पहली पदस्थापना उनके गृह जिले जबलपुर में ही मिली है। उन्होंने जबलपुर कलेक्ट्रेट में डिप्टी कलेक्टर के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लिया है। सामान्यतः किसी अधिकारी को प्रथम नियुक्ति में अपने गृह जिले में पदस्थापना मिलना विरल माना जाता है, ऐसे में यह उपलब्धि उनके लिए और भी विशेष बन गई है।
हिमांशु बचपन से ही शारीरिक चुनौतियों का सामना करते रहे हैं। वे केवल व्हीलचेयर के सहारे चल-फिर सकते हैं, लेकिन उन्होंने कभी अपनी परिस्थितियों को अपने सपनों पर हावी नहीं होने दिया। कठिन परिश्रम, अनुशासित अध्ययन और सकारात्मक सोच के बल पर उन्होंने वह मुकाम हासिल किया, जो लाखों युवाओं का सपना होता है।
उनकी सफलता न केवल जबलपुर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। हिमांशु सोनी ने यह सिद्ध कर दिया कि सफलता शारीरिक क्षमता से नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास से प्राप्त होती है।
आज जबलपुर अपने इस प्रतिभाशाली सपूत की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है। हिमांशु सोनी की सफलता उन सभी लोगों के लिए प्रेरणादायक संदेश है, जो जीवन की कठिन परिस्थितियों से निराश हो जाते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और संकल्प अडिग हो, तो कोई भी बाधा सफलता का मार्ग नहीं रोक सकती।










