1872 करोड़ की बाणसागर परियोजना पर EOW की नजर
82% कागजी प्रगति, जमीन पर अधूरे काम! EOW ने मांगे दस्तावेज—अब खुलेगा करोड़ों के भुगतान का राज?
सतना। जल जीवन मिशन के तहत सतना जिले के 785 गांवों तक पेयजल पहुंचाने वाली 1872 करोड़ रुपए की बाणसागर परियोजना-2 अब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच के घेरे में है। परियोजना में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों ने सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
शिकायतकर्ता शिवम त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि परियोजना की करीब 82 प्रतिशत प्रगति कागजों में दर्शाई गई, जबकि मौके पर कई कार्य अभी भी अधूरे हैं। इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि अधूरे कार्यों को पूर्ण दर्शाकर भुगतान किया गया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए EOW रीवा ने मध्य प्रदेश जल निगम, सतना के महाप्रबंधक तथा ठेका कंपनी KEC International के प्रोजेक्ट मैनेजर को नोटिस जारी किया है। दोनों को 2 और 3 सितंबर को आवश्यक दस्तावेजों के साथ EOW रीवा कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
मार्च 2025 तक पूरा होना था काम
बाणसागर परियोजना-2 के अंतर्गत मझगवां, नागौद और सोहावल ब्लॉक के 785 गांवों में पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। मध्य प्रदेश जल निगम ने यह कार्य KEC International को 10 मार्च 2023 को सौंपा था और इसे मार्च 2025 तक पूरा किया जाना था।
लेकिन अब परियोजना की प्रगति और भुगतान को लेकर उठे सवाल जांच एजेंसी के दरवाजे तक पहुंच चुके हैं।
कागजों में विकास या जमीन पर हकीकत?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि परियोजना की प्रगति वास्तव में 82 प्रतिशत है, तो फिर जमीनी स्तर पर अधूरे कार्यों की शिकायतें क्यों सामने आईं? क्या भुगतान कार्य की वास्तविक प्रगति के आधार पर हुआ या कागजी प्रगति के भरोसे?
EOW की जांच अब यह तय करेगी कि आरोप केवल शिकायत तक सीमित हैं या करोड़ों रुपए की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में वास्तव में नियमों की अनदेखी, फर्जी प्रगति और भुगतान में अनियमितता हुई है।
1872 करोड़ की परियोजना है, 785 गांवों का सवाल है और जनता के पानी का मामला है—अब दस्तावेज बोलेंगे और जांच तय करेगी कि कागजों की चमक के पीछे जमीन की सच्चाई क्या है।








