अवैध कॉलोनी पर चला बुलडोजर, 1.50 करोड़ की सरकारी जमीन कब्जामुक्त
कटंगी बायपास पर कॉलोनाइजरों की मनमानी पर निगम की चोट, सड़क तक उखाड़ दी; रमणगरा में भी जमीन कब्जे को लेकर बवाल
उजला दर्पण | जबलपुर
जबलपुर में सरकारी जमीन पर कब्जा कर अवैध कॉलोनी बसाने वालों पर आखिरकार नगर निगम का बुलडोजर चला। कटंगी बायपास क्षेत्र में नगर निगम की टीम ने कार्रवाई करते हुए करीब 1.50 करोड़ रुपए मूल्य की शासकीय भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया। कार्रवाई के दौरान अवैध कॉलोनी तक पहुंचने के लिए बनाई गई सड़क तक उखाड़ दी गई।
निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई ने उन लोगों में खलबली मचा दी, जो सरकारी जमीन को अपनी निजी जागीर समझकर प्लॉटिंग का खेल चला रहे थे।
नगर निगम के अनुसार कटंगी बायपास क्षेत्र में खसरा नंबर 366, 367 एवं 370/1 की भूमि पर बिना वैध अनुमति के कॉलोनी विकसित की जा रही थी। करीब 650 वर्गमीटर शासकीय भूमि का उपयोग कॉलोनी के पहुंच मार्ग के रूप में किया जा रहा था। निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण और सड़क को हटाया तथा सरकारी भूमि को अपने कब्जे में लिया।
नोटिस के बाद भी नहीं सुधरे तो चला बुलडोजर
नगर निगम की ओर से संबंधित निर्माणकर्ताओं को पहले ही कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। लेकिन जब जवाब संतोषजनक और वैधानिक नहीं मिला तो सक्षम स्वीकृति के बाद कार्रवाई की गई। सवाल यह है कि सरकारी जमीन पर कब्जा कर कॉलोनी विकसित करने की हिम्मत आखिर किसके संरक्षण में पैदा हुई?
कार्रवाई के दौरान कॉलोनी सेल और अतिक्रमण शाखा की टीम मौके पर मौजूद रही।
रमणगरा में प्लॉट के नाम पर जमीन का खेल, कब्जे को लेकर विवाद
इधर गोरखपुर क्षेत्र के रमणगरा में भी जमीन और प्लॉटिंग को लेकर विवाद सामने आया। मौके पर कब्जा लेने पहुंचे लोगों और भू-स्वामी के बीच विवाद की स्थिति बन गई। पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली।
एसडीएम गोरखपुर के अनुसार खसरा नंबर 99/3 में अवैध कॉलोनी काटकर प्लॉट बेचे जाने की शिकायतें सामने आई हैं। जिन लोगों को प्लॉट बेचे गए, उनमें से कुछ को मौके पर जमीन नहीं मिल रही है। मामले को लेकर सीएम हेल्पलाइन पर करीब 40 शिकायतें भी की गई हैं।
तहसीलदार, पटवारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचा, लेकिन बड़ा सवाल अब भी खड़ा है—जब अवैध कॉलोनी काटकर प्लॉट बेचे जा रहे थे, तब जिम्मेदार विभागों की निगरानी कहां थी?
सरकारी जमीन पर कब्जा आसान, कार्रवाई के लिए शिकायत जरूरी क्यों?
एक तरफ नगर निगम की कार्रवाई ने अवैध कॉलोनाइजरों को स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी जमीन पर कब्जा कर प्लॉटिंग का कारोबार ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगा। दूसरी तरफ रमणगरा जैसे मामले यह सवाल भी खड़ा करते हैं कि अवैध कॉलोनियां बनने के बाद ही प्रशासन क्यों जागता है?
उजला दर्पण का सवाल:
क्या अब कटंगी बायपास की तरह शहर के दूसरे इलाकों में भी सरकारी जमीन निगलने वाली अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर चलेगा, या कार्रवाई सिर्फ शिकायत और विवाद सामने आने के बाद ही होगी?









