अफसर हों तो ऐसी, वरना योजनाएं सिर्फ फाइलों में जिंदा रहती हैं

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( उजला दर्पण रामगोपाल सिंह उईके सीनियर रिपोर्टर मध्य प्रदेश )

एसडीएम प्रियंका भलावी ने गांव-गांव जाकर खोली जल जीवन मिशन की पोल, लापरवाही पर चला सख्त डंडा

नर्मदापुरम (सोहागपुर)

सरकारी योजनाओं की असलियत तब सामने आती है, जब कोई अफसर एसी दफ्तर छोड़कर गांव की गलियों में उतरता है। सोहागपुर में यही कर दिखाया है अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) सुश्री प्रियंका भलावी ने। जल जीवन मिशन के तहत बनी नल-जल योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए एसडीएम खुद मैदान में उतरीं और साफ कह दिया—अब कागजी रिपोर्ट नहीं, हर घर में पानी चाहिए।

एसडीएम प्रियंका भलावी ने तीन सदस्यीय टीम के साथ ग्राम छेड़का और हथनावड़ का औचक निरीक्षण किया। यह कोई दिखावटी दौरा नहीं था। मैडम ने फाइलें नहीं, सीधे ग्रामीणों से सवाल पूछे—

पानी आता है या नहीं? रोज आता है या कभी-कभार? पैसा लिया जा रहा है या नहीं?

देहात की भाषा में कहें तो, अफसर नहीं—गांव की बेटी बनकर सच उगलवाया गया।

ग्राम छेड़का में व्यवस्था कुछ हद तक ठीक मिली, लेकिन यहां भी एसडीएम ने ढील नहीं दी। पंचायत सचिव को सख्त निर्देश दिए गए कि पंप ऑपरेटर की विधिवत नियुक्ति कर योजना को नियमित रूप से चलाया जाए। एसडीएम का साफ संदेश था—

“आज पानी आ रहा है, तो कल बंद मिला तो जिम्मेदारी तय होगी।”

लेकिन असली शर्मनाक तस्वीर सामने आई ग्राम हथनावड़ में। यहां नल-जल योजना पिछले एक साल से बंद पड़ी मिली। न पानी, न जवाब और न जिम्मेदारी। गांव प्यासा रहा और सिस्टम सोता रहा। इस गंभीर लापरवाही पर एसडीएम प्रियंका भलावी ने बिना कोई नरमी दिखाए ग्राम पंचायत पामली के सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।

एसडीएम के शब्द साफ थे—

“जनता के हक के पानी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

इस निरीक्षण में एसडीएम के साथ सीईओ जनपद पंचायत सोहागपुर श्री प्रबल अरजारिया, सहायक यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी श्री यतेंद्र छारी एवं सहायक यंत्री जनपद पंचायत श्रीमती सुनीता वर्मा मौजूद रहे, लेकिन पूरे दौरे में अगर किसी का फोकस सबसे ज्यादा साफ और मजबूत दिखा, तो वह थीं—एसडीएम प्रियंका भलावी।

भाइयों-बहनों, यही फर्क होता है नाम के अफसर और काम के अफसर में। अगर बाकी जिम्मेदार समय रहते जाग जाते, तो एक साल से गांव प्यासा नहीं रहता।

सोहागपुर आज एक सुर में कह रहा है—

एसडीएम प्रियंका भलावी अफसर नहीं, सिस्टम को जिंदा रखने वाली मिसाल हैं।

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