जयपुर, माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष प्रहलाद राय टाक ने दीपावली के अवसर पर मिट्टी के दीयों, बर्तनों, और अन्य उत्पादों के उपयोग का आह्वान किया है। उन्होंने आम जनता और कॉर्पोरेट घरानों से अपील की है कि इस दिवाली मिट्टी से बने खिलौने, मूर्तियाँ, और रसोई के बर्तन उपहार में दें। इससे न केवल कुम्हार समुदाय को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे, बल्कि स्वदेशी उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे “राइजिंग राजस्थान” और “लोकल फॉर वोकल” अभियानों को गति मिलेगी।
प्रहलाद राय टाक ने उद्योग भवन स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि मिट्टी के उत्पादों के उपयोग से कुम्हार कामगारों की आय में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा बजट घोषणा के तहत माटी कला कामगारों के उत्थान के लिए 5 करोड़ रुपए की लागत से “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” की स्थापना की जाएगी, जिसका प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जा चुका है। इस केंद्र में कुम्हारों के प्रशिक्षण से लेकर नवीन तकनीकी और माटी कला पर्यटन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से होगा माटी कला का विकास
श्री टाक ने बताया कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से प्रदेश में माटी कला को एक नई दिशा मिलेगी। इसके अंतर्गत कामगारों को उन्नत तकनीकी मशीनों, मार्केटिंग, ब्रांडिंग, और अनुसंधान एवं विकास में मदद मिलेगी। इस पहल से माटी कला उद्योग में वृद्धि होगी और हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
1000 इलेक्ट्रिक चाक और मिट्टी गूंथने की मशीनों का वितरण
मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के अनुसार, इस वित्त वर्ष में 1000 इलेक्ट्रिक चाक और मिट्टी गूंथने की मशीनों का वितरण किया जाएगा, जिससे लगभग 10,000 प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। इन मशीनों के वितरण के लिए आवेदन ऑनलाइन माध्यम से लिए जाएंगे, और चयन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा।
इस पहल से माटी कला उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा और कुम्हार समुदाय को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा।











