
सतना मध्य प्रदेश l भारतीय सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी हाल ही में मध्य प्रदेश के चित्रकूट पहुंचे। उन्होंने तुलसी पीठ आश्रम में जगद्गुरु रामभद्राचार्य से राम मंत्र की दीक्षा ली। कार्यक्रम आध्यात्मिक था, लेकिन जो बात सबसे ज्यादा दिल छू गई — वो थी गुरु दक्षिणा की मांग।
दीक्षा के बाद, जब परंपरा के अनुसार गुरु दक्षिणा देने की बात आई, तो रामभद्राचार्य ने जो कहा, वो हर भारतीय के मन को छू गया।
उन्होंने कहा — “मुझे रत्न नहीं चाहिए, धन नहीं चाहिए। मेरी गुरु दक्षिणा POK है। जब तक पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर वापस नहीं आता, मेरी गुरु दक्षिणा अधूरी रहेगी।”
उन्होंने साफ कहा कि पीओके भारत का हिस्सा है और उसे वापस लाना सिर्फ ज़मीन का मामला नहीं, बल्कि देश की आत्मा से जुड़ा सवाल है।
गुरु बोले—“जब तक मेरा भारत पूरा नहीं होता, तब तक मुझे कुछ और नहीं चाहिए। यही मेरी इच्छा है, यही मेरी दक्षिणा है।”
रामभद्राचार्य ने भारतीय सेना की ताकत पर भरोसा जताया और कहा कि वो दिन दूर नहीं जब भारत फिर से अखंड होगा। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों की भी सराहना की और कहा कि अब देश सही दिशा में है।
इस पूरी घटना ने धार्मिक भावनाओं से हटकर एक राष्ट्रीय चेतना को छुआ है। सोशल मीडिया से लेकर आम जनता के बीच यह बयान चर्चा का विषय बन गया है।
चित्रकूट में सिर्फ एक दीक्षा नहीं हुई—वहां एक संकल्प लिया गया, एक सपना बोया गया। सपना, भारत को फिर से संपूर्ण देखने का।










