सतना मध्यप्रदेश : वार्ड नंबर 22, जहां से भाजपा के जिला अध्यक्ष खुद रहते हैं, वहां की सड़कों पर नाली का गंदा पानी हर दिन इस तरह बह रहा है जैसे शहर में कोई नाला फूट पड़ा हो। स्टार ऑटोमोबाइल के पीछे का इलाका नरक में बदल चुका है, लेकिन नगर निगम, पार्षद और जिम्मेदार अफसर कान में रुई डालकर बैठे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है — “सड़क नहीं, गटर में चल रहे हैं हम।” रोजाना इस बहते गंदे पानी से गुजरना मजबूरी बन चुका है। सवाल उठता है — जब नेता के अपने वार्ड का ये हाल है, तो बाकी शहर किस हालात में होगा?
नगर निगम का सफाई अमला ग़ायब है, पार्षद नदारद हैं और स्वच्छता अधिकारी शायद ‘रैंकिंग’ के आंकड़ों में ही उलझे हैं। नालियां सड़कों पर बह रही हैं, लेकिन कोई कुछ सुनने को तैयार नहीं।
क्या नगर निगम सिर्फ कैमरों के सामने झाड़ू चलाने और पोस्टर लगाने तक ही सीमित है? क्या शहर को स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर दिलाने की कोशिश सिर्फ दिखावे तक रह गई है?
बारिश आने वाली है। अगर अब भी ये गंदगी नहीं रुकी, तो सतना पानी में नहीं, सिस्टम की सड़ांध में डूब जाएगा।
जनता कह रही है — “अब बस, बहुत हो गया।” जल्द ही मंत्री से मिलकर ज्ञापन दिया जाएगा और ज़रूरत पड़ी तो सड़क पर उतरकर जवाब मांगा जाएगा।
क्योंकि सवाल सिर्फ बदबू का नहीं है, सवाल सिस्टम की सड़ांध का है।










